ई-शिक्षा कोष प्रणाली ने खोली पोल, पिछले 10 साल से लापता मिला शिक्षक!

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के शिक्षा विभाग ने स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर अपनी नीतियों को और सख्त कर दिया है। ई-शिक्षा कोष प्रणाली के तहत ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था ने कई शिक्षकों की अनुपस्थिति की सच्चाई को उजागर कर दिया है। हाल के दिनों में सामने आई विभिन्न रिपोर्टों से यह स्पष्ट हो रहा है कि नालंदा जिले के कई स्कूलों में शिक्षक न केवल महीनों, बल्कि कुछ मामलों में तो वर्षों से गायब हैं। इस गंभीर मामले ने शिक्षा विभाग को कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर किया है, जिसके तहत अब अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार इसलामपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय ब्रहगावां में तैनात सहायक शिक्षक चौधरी ब्रजकिशोर कुमार पिछले 10 वर्षों से यानी 12 दिसंबर 2015 से, विद्यालय से अनुपस्थित हैं। स्कूल के प्रधानाध्यापक ने इस मामले की जानकारी शिक्षा विभाग को दी और बताया कि शिक्षक ने बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के स्कूल आना बंद कर दिया। इस लंबी अनुपस्थिति ने न केवल स्कूल के शैक्षणिक माहौल को प्रभावित किया है, बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीपीओ) आनंद शंकर ने चौधरी ब्रजकिशोर कुमार को एक अंतिम नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि वह 15 दिनों के भीतर स्कूल में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराते और अपने कर्तव्यों का निर्वहन शुरू नहीं करते तो उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। डीपीओ ने इसे अनुशासनहीनता का गंभीर मामला करार देते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि बर्खास्तगी के साथ-साथ शिक्षक को सेवानिवृत्ति से संबंधित सभी लाभों, जैसे पेंशन और अन्य सुविधाओं से भी वंचित कर दिया जाएगा। विभाग ने इस मामले को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह नोटिस शिक्षक के लिए अंतिम चेतावनी है, और इसके बाद कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
बिहार शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई ई-शिक्षा कोष प्रणाली ने शिक्षकों की उपस्थिति पर निगरानी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षकों को अपनी दैनिक उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करनी होती है। इस प्रणाली ने उन शिक्षकों की पहचान करने में मदद की है, जो बिना किसी सूचना के लंबे समय से अनुपस्थित हैं। नालंदा जिले में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, जहां शिक्षक न केवल अनुपस्थित पाए गए, बल्कि कुछ का तो कोई अता-पता ही नहीं है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस तरह की अनुशासनहीनता न केवल शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती है, बल्कि छात्रों के भविष्य को भी खतरे में डालती है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्कूल में शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित रहें और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। जो शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
चौधरी ब्रजकिशोर कुमार की लंबी अनुपस्थिति ने मध्य विद्यालय ब्रहगावां के शैक्षणिक माहौल पर गहरा असर डाला है। स्कूल के अन्य शिक्षकों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ पड़ी है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ है। स्थानीय अभिभावकों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है और मांग की है कि शिक्षा विभाग इस तरह के मामलों में तुरंत कार्रवाई करे।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है। पूरे जिले में अनुपस्थित शिक्षकों की पहचान करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ई-शिक्षा कोष के डेटा के आधार पर ऐसे सभी शिक्षकों को चिह्नित किया जाएगा, जो बिना किसी वैध कारण के अनुपस्थित हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए और सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
इस मामले ने नालंदा जिले में शिक्षा व्यवस्था की खामियों को एक बार फिर उजागर किया है। यह सवाल उठता है कि आखिर एक शिक्षक 10 साल तक बिना किसी कार्रवाई के अनुपस्थित कैसे रह सकता है? क्या विभाग की निगरानी व्यवस्था में कोई कमी थी? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए विभाग ने एक जांच समिति गठित करने का भी निर्णय लिया है, जो इस मामले की गहराई से जांच करेगी।







