
हिलसा (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में आजादी के बाद से कई बदलाव देखने को मिले हैं। सड़कों से लेकर आवागमन की सुविधाओं तक में सुधार हुआ है, और मूलभूत ढांचा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्हें विकास पुरुष के रूप में जाना जाता है, उन्होंने हिलसा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2005 से उनके नेतृत्व में बिहार ने कई विकास परियोजनाओं को गति दी, जिसमें हिलसा का पूर्वी बाईपास भी शामिल है।
हालांकि, यह परियोजना कई कारणों से अब तक पूरी नहीं हो सकी है। नालंदा दर्पण की टीम ने हिलसा के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम लोगों से इस मुद्दे पर बातचीत की, जिसमें कई रोचक तथ्य सामने आए।
हिलसा शहर में जाम की समस्या लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा रही है। खासकर बाजार की सेकेंड सड़क पर बड़े वाहनों के आवागमन के कारण आए दिन जाम लगता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2005 में तत्कालीन जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने हिलसा में पूर्वी बाईपास बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था।
इस प्रस्ताव को गति मिली और वर्ष 2012 में बाईपास निर्माण के लिए टेंडर निकाला गया। उस समय परियोजना की लागत 89.73 करोड़ रुपये थी, जो 2019 तक बढ़कर 245.98 करोड़ रुपये हो गई।
इस बाईपास के निर्माण में दो रेलवे ओवरब्रिज की आवश्यकता को देखते हुए, बिहार सरकार ने इस परियोजना का जिम्मा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को सौंपा। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक शिथिलता के कारण यह परियोजना बार-बार अटकती रही।
हिलसा में बाईपास को लेकर पूरब और पश्चिम के बीच लंबे समय तक विवाद चला। वर्ष 2012 में टेंडर निकलने के बाद स्थानीय स्तर पर पूरब और पश्चिम बाईपास की मांग को लेकर राजनीति शुरू हो गई। यह विवाद 2014 के लोकसभा चुनाव तक चला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिलसा के रामबाबू उच्च विद्यालय के मैदान में एक चुनावी सभा के दौरान दोनों दिशाओं में बाईपास बनाने की घोषणा की। इस घोषणा का जदयू उम्मीदवार को उस चुनाव में लाभ भी मिला।
हालांकि, पश्चिमी बाईपास का निर्माण शुरू हो गया। लेकिन पूर्वी बाईपास के लिए धरातल पर कोई प्रगति नहीं हुई। इससे पूर्वी क्षेत्र के लोग नाराज हुए और उन्होंने धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज किया। फरवरी 2019 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिलसा में एक जनसभा के दौरान पूर्वी बाईपास का शिलान्यास किया। जिससे लोगों में उम्मीद जगी।
जबकि पूर्वी बाईपास के निर्माण से हिलसा के पूर्वी क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी। वर्तमान में पश्चिमी क्षेत्र में सरकारी कार्यालयों की अधिकता के कारण वहां विकास पहले से ही अधिक हुआ है, जबकि पूर्वी क्षेत्र में यह गति धीमी रही है।
पूर्वी बाईपास बनने से हिलसा प्रखंड की आठ पंचायतें बारा, कामता, इंदौत, कपसियावां, पूना, अरपा, जूनियार और अकबरपुर सीधे जुड़ जाएंगी। साथ ही हिलसा के उत्तर और दक्षिण क्षेत्र के लोगों को बिहारशरीफ जाने के लिए बाजार की भीड़भाड़ से गुजरने की मजबूरी खत्म होगी।
यह बाईपास दो लेन में बनाया जाएगा, जिसकी लंबाई 6.757 किलोमीटर और चौड़ाई 7 मीटर होगी। कालीकरण के साथ इसकी चौड़ाई 12 मीटर तक होगी। परियोजना के लिए 30.4 मीटर चौड़ाई में 47.385 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है, जिसमें 6 मौजा कामता, मोमिंदपुर, मियां बिगहा, हिलसा, इंदौत और मई शामिल हैं। यह बाईपास दनियावां-गया एसएच-4 के कामता हाल्ट से शुरू होकर ढिबरापर रेलवे क्रॉसिंग के पास मिलेगा।
पूर्वी बाईपास के लिए 28 अप्रैल 2025 को निविदा प्रक्रिया शुरू हुई थी। परियोजना की कुल लागत अब 276.37 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें दो रेलवे ओवरब्रिज, चार पुल और 11 पुलिया शामिल हैं।
निर्माण का जिम्मा हरि कंस्ट्रक्शन एंड एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड बेगूसराय को दिया गया है। निर्माण कार्य शुरू होने के दो-तीन दिन बाद ही ठप हो गया। निर्माण एजेंसी के सुपरवाइजर ने दावा किया कि कार्य जल्द ही नियमित रूप से शुरू होगा, लेकिन स्थानीय लोग अब भी संशय में हैं।
हिलसा के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि पूर्वी बाईपास न केवल जाम की समस्या को हल करेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देगा। पूरब बाईपास बनने से हमारे गांवों को सीधा लाभ होगा। बाजार में जाम की समस्या खत्म होगी और बिहारशरीफ तक आवागमन आसान हो जाएगा। लेकिन प्रशासनिक देरी और स्थानीय राजनीति ने इस परियोजना को बार-बार प्रभावित किया है।
अब यह देखना बाकी है कि क्या यह परियोजना समय पर पूरी हो पाएगी और हिलसा की जनता को जाम से मुक्ति मिल पाएगी। नालंदा दर्पण इस मुद्दे पर नजर बनाए रखेगा और समय-समय पर अपडेट देता रहेगा।







