Home बेन किसान-ग्रामीणों को मॉनसून के साथ सता रही कच्ची सड़क की चिंता

किसान-ग्रामीणों को मॉनसून के साथ सता रही कच्ची सड़क की चिंता

Farmers are worried about the unpaved road along with the monsoon
Farmers are worried about the unpaved road along with the monsoon

बेन (नालंदा दर्पण) नालंदा जिले के कई गांव आज भी कच्ची सड़क  के कारण विकास की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और बिहार सरकार की मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के बावजूद, प्रखंड के कुछ गांवों में कच्ची सड़कें अब तक पक्की नहीं हो सकी हैं। इन सड़कों की जर्जर स्थिति ने न केवल ग्रामीणों के आवागमन को मुश्किल बना दिया है, बल्कि गांवों के समग्र विकास को भी प्रभावित किया है।

प्रखंड मुख्यालय से मांड़ी और इनायतपुर को जोड़ने वाली सड़क की स्थिति बदहाल है। इस सड़क के कच्चे होने के कारण ग्रामीणों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर बिरवल बिगहा से वभनियावां को जोड़ने वाली सड़क की दूरी मात्र डेढ़ से दो किलोमीटर है। लेकिन इसकी जर्जर हालत के कारण यह रास्ता उपयोग के लायक नहीं है। ग्रामीण लंबे समय से इस सड़क पर पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) या पेवर्स ब्लॉक सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगें अनसुनी रह गई हैं।

विशेष रूप से बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। कच्ची सड़कों पर कीचड़ जमा हो जाता है। जिसके कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। एकसारा पंचायत के अंतर्गत वभनियावां से बिरवल विगहा को जोड़ने वाली सड़क इसका जीता-जागता उदाहरण है।

इस सड़क पर मुखिया द्वारा लगभग 200-250 फीट तक ईंट सोलिंग का कार्य कराया गया है। लेकिन शेष हिस्सा अब भी कच्चा है। बारिश में यह हिस्सा कीचड़ से भर जाता है, जिससे आवागमन लगभग असंभव हो जाता है।

ग्रामीणों ने अपनी परेशानियों को बयां करते हुए बताया कि कच्ची सड़कों के कारण उनकी दिनचर्या और आजीविका पर बुरा असर पड़ रहा है।

विशुनदेव प्रसाद कहते हैं कि बरसात के दिनों में इन रास्तों से गुजरना मुश्किल भरा हो जाता है। कीचड़ के कारण पैदल चलना भी जोखिम भरा है।

सुखदेव प्रसाद ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि हमने पंचायत प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों से कच्ची सड़क का पीसीसीकरण या पेवर्स ब्लॉक सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि आवागमन में सुविधा हो।

विरेन्द्र प्रसाद का कहना है कि इन रास्तों के पक्के होने से प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय और मेहनत की बचत होगी।

किसानों के लिए भी यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है। विन्देश्वर गोप बताते हैं कि सड़क पक्की होने से खेतों तक जाना आसान होगा। अभी कीचड़ के कारण फसलों और उपकरणों को ले जाना मुश्किल होता है।

वहीं पंचायत समिति फंड से इस सड़क पर पिछले वर्ष कुछ मिट्टीकरण का कार्य कराया गया था। मुखिया प्रतिनिधि एकसारा नीरज प्रसाद बताते हैं कि  पिछले वर्ष पंचायत समिति फंड से मिट्टी का कार्य कराया गया था। नियमानुसार, तीन वर्ष बाद ही इस सड़क पर दूसरी योजना से कार्य कराया जा सकता है।

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि आंशिक कार्य से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। वे चाहते हैं कि सड़क का पूर्ण निर्माण जल्द से जल्द हो, ताकि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो सके।

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