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राजगीर-सालेपुर बौद्ध सर्किट फोरलेन पर गाड़ा किसान विरोध प्रदर्शन का बोर्ड

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर को बौद्ध सर्किट से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी राजगीर-सालेपुर फोरलेन सड़क परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। भूमि अधिग्रहण में कथित भेदभाव और बेहद कम मुआवजा तय किए जाने से आक्रोशित नगर पंचायत सिलाव के किसानों ने निर्माण स्थल पर विरोध का बोर्ड गाड़कर सरकार और प्रशासन को खुली चेतावनी दी है।

किसानों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उचित मुआवजा का भुगतान नहीं होगा, तब तक सड़क निर्माण का कार्य किसी भी हाल में नहीं होने दिया जाएगा।

यह पूरा मामला सिलाव अंचल के थाना नंबर 420, मौजा सिलाव से जुड़ा है। यहां नुरसराय-अहियापुर-सिलाव-राजगीर बौद्ध सर्किट रोड परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया गया है।

किसानों का आरोप है कि एक ही परियोजना में अलग-अलग पंचायतों के लिए अलग-अलग मुआवजा दर तय कर सरकार दोहरी नीति अपना रही है।

किसानों के अनुसार सिलाव मौजा नगर पंचायत क्षेत्र में आता है। बावजूद इसके उन्हें प्रति डिसमिल मात्र 82,500 रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है। जबकि इसी मौजा का सर्किल रेट करीब 4 लाख 90 हजार रुपये प्रति डिसमिल है। वहीं बगल की पंचायत में अधिग्रहित भूमि का मुआवजा 1 लाख 21 हजार रुपये प्रति डिसमिल तय किया गया है। इस असमानता को लेकर किसानों में भारी रोष है।

किसानों ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2017 में इसी क्षेत्र में सालेपुर-नूरसराय-सिलाव पथ परियोजना के दौरान मुआवजा सर्किल रेट से दोगुना से भी अधिक लगभग 3 लाख 60 हजार रुपये प्रति डिसमिल दिया गया था, जिसे किसानों ने सहर्ष स्वीकार किया था। अब अचानक मुआवजा दर में इतनी बड़ी कटौती किसानों के गले नहीं उतर रही।

किसानों का कहना है कि उन्हें भूमि अधिग्रहण का अवार्ड नोटिस 17 दिसंबर को दिया गया, जबकि अक्टूबर के अंत में ही जमीन पर फसल बोई जा चुकी थी। ऐसे में वे केवल भूमि मुआवजा ही नहीं, बल्कि फसल क्षति का मुआवजा भी दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

किसानों का आरोप है कि बिना फसल मुआवजा दिए प्रशासन जल्दबाजी में निर्माण कार्य शुरू कराना चाहता है। करीब दस दिन पूर्व एडीएम द्वारा किसानों के साथ बैठक कर कार्य जारी रखने का आग्रह किया गया था।

किसानों का आरोप है कि बैठक के दौरान प्रशासन ने यह भी कहा कि अगर वे सहमत नहीं हुए तो जबरन सड़क निर्माण कराया जाएगा। इस कथित धमकी के बाद किसानों का आक्रोश और बढ़ गया। अब मौजा सिलाव के सभी रैयत एकजुट होकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला कर चुके हैं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए बोर्ड पर साफ-साफ लिखा गया है कि जब तक उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक कार्य नहीं होगा।  किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जबरन काम कराने की कोशिश करता है तो वे आत्मदाह जैसे कठोर कदम उठाने को भी मजबूर हो सकते हैं।

किसान कुमुद देवी, अजय कुमार, सुरेंद्र प्रसाद, सीताराम प्रसाद, रवि शंकर कुमार, रजनीश कुमार, नागेश्वर प्रसाद सिंह, अनिल पांडेय, मनोज कुमार, नंदकिशोर चौधरी, राकेश कुमार, संजीव पांडेय, राजीव रंजन कुमार, कुंदन कुमार आदि किसानों ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि सम्मान और न्याय की है।

बौद्ध सर्किट फोरलेन सड़क परियोजना से जहां पर्यटन और विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। वहीं किसानों का यह आंदोलन अब परियोजना की रफ्तार पर ब्रेक लगा सकता है। यदि प्रशासन और सरकार ने समय रहते किसानों की मांगों पर विचार नहीं किया तो यह विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में और उग्र रूप ले सकता है।

फिलहाल सिलाव मौजा में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या सरकार किसानों को उनका हक दिलाकर विकास की राह आसान बनाएगी या फिर यह परियोजना मुआवजे के विवाद में उलझकर रह जाएगी?

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