एकंगरसराय में बाढ़: बांस की चचरी बना सहारा, प्रशासन लापता

एकंगरसराय (नालंदा दर्पण)। फल्गु नदी में अचानक जल स्तर बढ़ने से एकंगरसराय प्रखंड के कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है। मीना बाजार मंडा जाने वाली मुख्य सड़क लाला बिगहा पुल के समीप 60-70 फुट तक टूट जाने से मंडाक्ष, घाना बिगहा पुलपर, बरछी बिगहा, गजो बाग, टीकहिपर, मठपर जैसे गांव पूरी तरह कट गए हैं।

इस संकट की घड़ी में स्थानीय लोगों ने बांस की चचरी बनाकर आवागमन का एकमात्र रास्ता तैयार किया है, जिसके सहारे लोग नदी के इस पार से उस पार आ-जा रहे हैं। हालांकि, वाहनों का आवागमन पिछले दो दिनों से पूरी तरह ठप है।

शनिवार की रात को नदी के जल स्तर में कुछ कमी आई थी, लेकिन रविवार को फिर से जल स्तर बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो गई। दो दिन बीत जाने के बावजूद जिला और प्रखंड प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी सहायता का अभाव लोगों के बीच गहरी नाराजगी का कारण बन रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

बाढ़ के कारण बिजली के खंभे और तार क्षतिग्रस्त होने से कई गांवों में दो दिनों से बिजली आपूर्ति बंद है। इससे नल-जल योजना और निजी बोरिंग भी ठप हो गए हैं, जिसके चलते पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है। लोग पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।

तेल्हाड़ा, केशोपुर, मंडा, कोशियावा पंचायत के धनगांवा, धनगांवा गढ़पर, रुचुनपुरा और मानपुर के खंधे बाढ़ के पानी से पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। खेतों में लगी धान की फसल डूबकर बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में लोग दहशत में हैं और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

प्रशासन की अनुपस्थिति में ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ से बांस की चचरी बनाकर आवागमन का रास्ता तो निकाल लिया, लेकिन यह अस्थायी समाधान लंबे समय तक कारगर नहीं हो सकता। भारी वाहनों और आपातकालीन सेवाओं के लिए यह व्यवस्था कतरनाक है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र सड़क की मरम्मत और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू करने की मांग की है।

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