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फसल क्षति सहायता योजना में फर्जीवाड़ा असल किसानों की बड़ी बाधा

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। फसल क्षति सहायता योजना के तहत बिहार सरकार की मंशा भले ही किसानों को राहत प्रदान करने की रही हो, लेकिन जिले में कुछ लोगों की गलत मंशा और फर्जीवाड़े के कारण इस योजना का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो रही है।

नालंदा जिले में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक ही खेत के लिए मालिक और बटायेदार दोनों ने अलग-अलग आवेदन जमा किए हैं। जब कृषि विभाग की टीम ने खेतों का सत्यापन करने के लिए दौरा किया तो कई स्थानों पर न तो खेत का मालिक और न ही बटायदार मौके पर मौजूद मिला। इस स्थिति ने विभाग को संदेह के घेरे में ला दिया, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में आवेदन खारिज करने पड़े।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की गड़बड़ियां न केवल योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाती हैं, बल्कि उन वास्तविक किसानों को भी प्रभावित करती हैं, जिन्हें इस सहायता की सख्त जरूरत है।

संयुक्त निदेशक कृषि विपणन सुदामा महतो ने हाल ही में आयोजित कृषि इनपुट समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी आवेदनों का गहन सत्यापन कर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि वास्तविक किसानों तक समय पर सहायता राशि पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कृषि विभाग के अनुसार फसल क्षति सहायता योजना का लाभ केवल उन किसानों को दिया जाएगा, जिनके दस्तावेज और सत्यापन पूरी तरह से नियमों के अनुरूप होंगे। विभाग ने चेतावनी दी है कि फर्जीवाड़ा करने वाले चाहे वे खेत के मालिक हों या बटायदार, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिंद प्रखंड के ताजनीपुर पंचायत से सबसे अधिक आवेदन खारिज किए गए हैं। यहां 473 हेक्टेयर भूमि के लिए कुल 2469 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 1003 आवेदन सत्यापन में गलत पाए गए और खारिज कर दिए गए। इसी तरह लोदीपुर पंचायत से 10 किसानों ने आवेदन किया था, लेकिन सभी आवेदन नियमों का पालन न करने के कारण रद्द कर दिए गए।

जिला कृषि अधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि लगभग 30% आवेदनों में एक ही खेत के लिए दो-दो दावेदार सामने आए हैं। कई मामलों में खेत के मालिक बिहार से बाहर रहते हैं और सत्यापन के लिए आवश्यक फोटो अपलोड करने या मौके पर उपस्थित होने में असमर्थ रहते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के नियमों के अनुसार, खेत के साथ किसान की फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती, तो आवेदन स्वीकृत नहीं किया जा सकता।

डॉ. कुमार ने चेतावनी दी कि सत्यापन के लिए उपस्थित न होने वाले किसानों के आवेदन स्वतः रद्द कर दिए जाएंगे। विभागीय आंकड़ों के अनुसार हरनौत और बिंद प्रखंड से 11695 हेक्टेयर भूमि के लिए कुल 14468 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इनमें से अबतक 12497 आवेदनों का सत्यापन पूरा हो चुका है और 3050 आवेदन खारिज किए गए हैं।

उतरथु पंचायत में भी सत्यापन के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां कुल 179 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन सत्यापन के बाद केवल 40 आवेदन ही स्वीकृत किए गए। शेष सभी आवेदन नियमों का पालन न करने के कारण खारिज कर दिए गए।

कृषि विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि फसल क्षति सहायता योजना का उद्देश्य उन किसानों को राहत प्रदान करना है, जो प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से फसल नुकसान का सामना कर रहे हैं। लेकिन फर्जीवाड़े के कारण इस योजना का लाभ वास्तविक हकदारों तक पहुंचने में देरी हो रही है।

विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे सही दस्तावेज और जानकारी के साथ आवेदन करें ताकि सत्यापन प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए।

साथ ही विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि फर्जीवाड़े के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस योजना के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने सत्यापन प्रक्रिया को और कड़ा करने का फैसला किया है।

बहरहाल फसल क्षति सहायता योजना नालंदा जिले के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन फर्जीवाड़े और गलत मंशा के कारण इसके लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने में चुनौतियां सामने आ रही हैं। कृषि विभाग की सख्ती और सत्यापन प्रक्रिया से यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही वास्तविक किसानों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा।

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