हिलसा (नालंदा दर्पण)। चंडी थाना क्षेत्र से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे नालंदा जिले को झकझोर कर रख दिया। चंडी थाना क्षेत्र के गौढ़ापर-सालेहपुर मोड़ के पास तेज रफ्तार कार के अनियंत्रित होकर पलटने से नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी छात्र इलेक्ट्रिकल ब्रांच के थर्ड ईयर के थे और एक साथ सफर कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी। जैसे ही वाहन गौढ़ापर मोड़ के पास पहुंचा, चालक संतुलन खो बैठा और कार सड़क से उतरकर गहरे गड्ढे में जा गिरी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और अंदर बैठे सभी छात्र बुरी तरह फंस गए। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को बाहर निकाला।
स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो छात्रों को मृत घोषित कर दिया। वहीं तीसरे छात्र ने इलाज के दौरान पटना में दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान आशीष कुमार (जमुई), राहुल रंजन (कटिहार) और उत्सव कुमार (समस्तीपुर) के रूप में हुई है। घायलों में धीरज कश्यप (गया) और शशिकांत कुमार (रोहतास) शामिल हैं, जिनका इलाज जारी है।
मॉडल सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान माहौल बेहद गमगीन हो गया। परिजनों के चीत्कार और रोने की आवाजों से अस्पताल परिसर देर रात तक गूंजता रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र भी अपने साथियों को अंतिम विदाई देने पहुंचे, जिनकी आंखों में आंसू और चेहरे पर गहरा सदमा साफ दिखाई दे रहा था।
घटना की जानकारी मिलते ही चंडी स्थित नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज में शोक की लहर दौड़ गई। कॉलेज प्रशासन और प्राचार्य डॉ. गोपाल नंदन ने इस घटना को संस्थान के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृत छात्रों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार के खतरों की ओर इशारा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार की गति नियंत्रित होती, तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता। ग्रामीण सड़कों पर तेज रफ्तार और लापरवाही अक्सर जानलेवा साबित हो रही है, जिससे सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिक रफ्तार पर वाहन का नियंत्रण अचानक बिगड़ना आम बात है, खासकर मोड़ या खराब सड़कों पर। ऐसे में जरूरी है कि युवा चालक गति पर नियंत्रण रखें और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें। प्रशासन को भी संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी संकेत, स्पीड ब्रेकर और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक कड़वा सबक है कि तेज रफ्तार का रोमांच पलभर का होता है, लेकिन उसका अंजाम कई जिंदगियां तबाह कर देता है। तीन होनहार छात्रों की असमय मौत ने न केवल उनके परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। स्रोतः नालंदा दर्पण/मीडिया रिपोर्टस्
