
हिलसा (नालंदा दर्पण)। हिलसा नगर परिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शहर की प्रमुख राजस्व स्रोतों की सैरात बंदोबस्ती सोमवार को पूरी कर ली। सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले संवेदक इंद्रजीत कुमार ने 90 लाख 72 हजार रुपये में यह अधिकार हासिल कर लिया।
पिछले साल की तुलना में इस बार नगर परिषद को करीब 4.50 लाख रुपये का अतिरिक्त मुनाफा हुआ है, जो स्थानीय प्रशासन के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, बोलीदाताओं की संख्या सिर्फ तीन रहने और बोली आधार मूल्य से महज 9,400 रुपये ऊपर चढ़ने से कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
नगर परिषद कार्यालय में दोपहर 12 बजे से शुरू हुई इस बंदोबस्ती प्रक्रिया में कुल तीन संवेदक शामिल हुए शैलेंद्र कुमार, इंद्रजीत कुमार और शशि कुमार। नगर परिषद द्वारा निर्धारित सरकारी आधार मूल्य 90 लाख 62 हजार 600 रुपये था। संवेदकों की डाक बोली में कोई खास प्रतिस्पर्धा नहीं देखी गई और अंतिम बोली 90 लाख 72 हजार पर ही सिमट गई।
इस सैरात के अंतर्गत हिलसा शहर में लगने वाले व्यवसायिक शुल्क, श्री व्हीलर, ई-रिक्शा, नगर परिषद क्षेत्र में आने वाले विभिन्न स्टैंड, वाहनों पर बाजार में बिक्री के लिए आने वाली वस्तुओं पर शुल्क, फेरी व्यवसायिक शुल्क, चारपहिया स्टैंड, वेंडर जोन और बस पड़ाव आदि शामिल हैं। ये सभी मदें नगर परिषद की रोजाना की आय का मुख्य आधार हैं, जिन्हें ठेकेदार के माध्यम से वसूल किया जाएगा।
पिछले साल से तुलना: वित्तीय वर्ष 2025-26 में हिलसा नगर परिषद की सैरात 86 लाख 20 हजार रुपये में बंदोबस्त हुई थी। इस बार 4.50 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि यह वृद्धि औसत से कम है, खासकर तब जब महंगाई और शहरी विकास की गति को देखें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बोलीदाताओं की संख्या बढ़ती तो राजस्व में और बेहतर उछाल आ सकता था। कम प्रतिस्पर्धा का कारण स्थानीय बाजार की स्थिति, ठेकेदारी के जोखिम या फिर कुछ बड़े खिलाड़ियों का दबदबा भी हो सकता है।
प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर बंदोबस्ती के दौरान मुख्य पार्षद धनंजय कुमार, उपमुख्य पार्षद दुर्गा कुमारी, सशक्त समिति सदस्य सुजान्ति देवी, राकेश कुमार शर्मा समेत नगर प्रबंधक कुमार गौतम और प्रधान सहायक अलवेला प्रसाद मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया।
नगर प्रबंधक कुमार गौतम ने बताया कि सैरात से प्राप्त राशि सीधे शहर की सफाई, सड़क सुधार, नाली निर्माण और अन्य नागरिक सुविधाओं में खर्च की जाएगी।
राजस्व बढ़ोतरी का क्या मतलब? यह बंदोबस्ती स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। हिलसा जैसे छोटे शहर में जहां रोजगार के अवसर सीमित हैं, सैरात ठेकेदारों को व्यवस्थित तरीके से शुल्क वसूली का अधिकार देती है, जिससे अनधिकृत फेरीवालों और अवैध पार्किंग पर अंकुश लगता है। 4.50 लाख रुपये की बढ़ोतरी भले ही मामूली लगे, लेकिन लगातार राजस्व वृद्धि से नगर परिषद को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे।
दूसरी ओर सिर्फ तीन बोलीदाताओं का शामिल होना चिंता का विषय भी है। यदि भविष्य में प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जाए। जैसे ऑनलाइन बोली प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाकर तो राजस्व में और तेजी आ सकती है। इंद्रजीत कुमार जैसे अनुभवी ठेकेदार के हाथों में यह जिम्मेदारी सौंपे जाने से उम्मीद है कि शुल्क वसूली सुचारू रूप से होगी और शहरवासियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
नालंदा जिले के विकास में हिलसा नगर परिषद की भूमिका बेहद अहम है। इस सैरात बंदोबस्ती से मिले राजस्व का सही उपयोग यदि किया गया तो न सिर्फ शहर साफ-सुथरा और सुव्यवस्थित बनेगा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
नालंदा दर्पण लगातार निगरानी रखेगा कि बंदोबस्ती के बाद शुल्क वसूली कितनी पारदर्शी रहती है और नगर परिषद इसका कितना बेहतर उपयोग करता है। पाठकों की राय क्या है? कमेंट में जरूर बताएं।





