हिलसा SDO ने नालंदा DM को भेजी जांच रिपोर्ट, इस्लामपुर BSO ने की अवैध वसूली

हिलसा SDO के इस रिपोर्ट ने एक बार फिर से सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति जनता का विश्वास खोने का खतरा पैदा कर दिया है। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में किस तरह की कार्रवाई करता है

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी (BSO) अरुण कुमार पर आरोप है कि वे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने के नाम पर अवैध राशि वसूलते हैं। इस मामले की जांच हिलसा अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) द्वारा की गई है। जिसके बाद उन्होंने नालन्दा जिला पदाधिकारी (DM) को एक पत्र भेजा है। जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है और कार्रवाई की अनुसंशा की है।

इस संबंध में आरटीआई के तहत खुदागंज थाना क्षेत्र अंतर्गत पिलखी गांव निवासी चंपा देवी को संबंधित पत्र उपलब्ध कराया है। उसमें उल्लेख है कि हिलसा अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा इसलामपुर प्रखंड का औचक निरीक्षण किया गया। जिसमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने में कई अनियमितताएँ पाई गईं।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई प्रमाण पत्र बिना शपथ पत्र और बिना ऑनलाइन आवेदन के निर्गत किए जा रहे थे, जो नियमों का उल्लंघन था। प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार ने स्वीकार किया कि कई आवेदकों से शपथ पत्र नहीं लिया गया और कई बार प्रमाण पत्र बिना शपथ पत्र के ही जारी कर दिए गए।

इसके अलावा जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इसलामपुर प्रखंड में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदकों से बिना कोई वैध कारण के धनराशि ली जाती थी। लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए 500 रुपये तक की राशि चुकानी पड़ी। जोकि बिचौलिए के माध्यम से वसूली जाती थी। इन बिचौलियों का आरोप था कि वे प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पैसे लेकर काम करते थे।

प्रखंड विकास पदाधिकारी ने भी इस मुद्दे पर अपनी जानकारी दी और बताया कि इसलामपुर प्रखंड में अक्सर शिकायतें प्राप्त होती हैं कि प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के द्वारा अवैध रूप से राशि ली जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि दो लाभार्थियों ने शिकायत की थी। जिसके बाद राशि वापस करवाई गई थी।

जांच रिपोर्ट के अंत में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार की भूमिका संदिग्ध है और उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है। इस संदर्भ में अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है, ताकि इस तरह के भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिल सके।

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