अजातशत्रु स्तूप संरक्षित क्षेत्र में अवैध निर्माण, ASI ने EO पर कराया FIR दर्ज

राजगीर (नालंदा दर्पण)। भारत सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक अजातशत्रु स्तूप के निकट नगर परिषद राजगीर द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्य शुरू कराए जाने का मामला सामने आया है। इस गंभीर उल्लंघन के खिलाफ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण सहायक विक्रम कुमार झा ने राजगीर थाना में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। जिसके आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

यह घटना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि देश की अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए भी एक गंभीर खतरा बन सकती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अजातशत्रु स्तूप  को राष्ट्रीय महत्व का केंद्रीय संरक्षित स्मारक घोषित किया है। उसके आसपास का क्षेत्र प्रोहिबिटेड जोन माना जाता है।

प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा 19 (1) के तहत इस क्षेत्र में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत, नवीकरण, खनन, उत्खनन या ब्लास्टिंग कार्य पूरी तरह से वर्जित है। इसके बावजूद नगर परिषद राजगीर ने स्तूप के पश्चिमी हिस्से में एक पार्क के निर्माण के लिए कार्य शुरू करवाया, जिसे पुरातत्व विभाग ने अवैध करार दिया है।

संरक्षण सहायक विक्रम कुमार झा ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह निर्माण कार्य न केवल प्राचीन स्मारक संरक्षण कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह अजातशत्रु स्तूप जैसे ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार ने बिना किसी अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण कार्य शुरू करवाया, जो प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम, 2010 की धाराओं का स्पष्ट उल्लंघन है।

बता दें कि मगध सम्राट अजातशत्रु के शासनकाल से संबंधित अजातशत्रु स्तूप एक महत्वपूर्ण पुरातत्वीय स्थल है। यह बौद्ध धर्म के साथ भारतीय इतिहास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित कर इसकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी ली है।

इस तरह के ऐतिहासिक स्थलों के आसपास किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण न केवल स्मारक की संरचनात्मक अखंडता को खतरा पहुंचाता है, बल्कि इसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्य को भी कमजोर करता है।

इस मामले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार ने सफाई देते हुए कहा है कि हम एक छोटे पार्क का निर्माण करवा रहे थे, जिसका उद्देश्य क्षेत्र को सुंदर बनाना था। हमें इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह कार्य प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है।

उन्होंने आगे बताया कि इस मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है और उनके दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पुरातत्व विभाग का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से पहले अनुमति लेना अनिवार्य है और इसकी अनदेखी कानूनी अपराध है।

यह घटना न केवल कानूनी दृष्टिकोण से गंभीर है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय और इतिहास प्रेमियों के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है। राजगीर अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए विश्वभर में जाना जाता है। यहां इस तरह की घटनाएं पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति लोगों का विश्वास कम कर सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है। पुरातत्व विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल प्राथमिकी दर्ज कराई है, बल्कि निर्माण कार्य को तत्काल रोकने का भी आदेश दिया है।

विभाग ने नगर परिषद को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है और इस बात की जांच शुरू कर दी है कि निर्माण कार्य से स्मारक को किसी प्रकार का नुकसान तो नहीं पहुंचा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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