बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नालंदा जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। नालंदा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी और प्रभावशाली स्थानीय नेता कौशलेंद्र कुमार उर्फ ‘छोटे मुखिया’ बिहारशरीफ राजेंद्र आश्रम स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में आज गुरुवार को कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया।
इस अवसर पर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं बिहार प्रभारी देवेंद्र यादव भी उपस्थित थे। साथ ही राजगीर के पूर्व विधायक रवि ज्योति और पूर्व जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार भी मौजूद रहे।
कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया नालंदा के राजनीतिक परिदृश्य में एक जाना-माना नाम हैं। उनकी लोकप्रियता और क्षेत्र में मजबूत जनाधार के कारण उनका यह कदम BJP के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
छोटे मुखिया ने अपने संबोधन में कहा कि मैंने हमेशा जनता की सेवा को प्राथमिकता दी है। कांग्रेस की विचारधारा और इसके नेतृत्व में मुझे वह मंच दिखता है, जो नालंदा के लोगों के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जद(यू)-BJP गठबंधन सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि वर्तमान सरकार ने नालंदा के विकास को नजरअंदाज किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
छोटे मुखिया के इस कदम को नालंदा में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं कार्यक्रम में उपस्थित कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव देवेंद्र यादव ने नीतीश कुमार सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार को विकास के मामले में पीछे धकेल दिया है। नालंदा, जो कभी शिक्षा का वैश्विक केंद्र था, आज मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस नालंदा में बदलाव की लहर लाएगी। हमारा लक्ष्य है कि नालंदा के लोगों को वह सम्मान और विकास मिले, जिसके वे हकदार हैं। छोटे मुखिया के कांग्रेस में शामिल होने को ‘जनता की फैसला’ करार दिया और कहा कि यह कदम बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत है।
बता दें कि नालंदा जिला बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला है। जोकि हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। छोटे मुखिया जैसे स्थानीय नेताओं का कांग्रेस में शामिल होना न केवल BJP के लिए चुनौती है, बल्कि यह नीतीश कुमार की जद(यू) के लिए भी एक चेतावनी है। छोटे मुखिया के इस ताजा कदम से नालंदा की कुछ सीटों पर मतदाताओं का रुझान बदल सकता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां उनकी पकड़ मजबूत है।
कांग्रेस सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में नालंदा को विशेष प्राथमिकता दे रही है। पार्टी ने पहले ही कई स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क साधना शुरू कर दिया है। ताकि जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत किया जा सके।
बहरहाल, बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, नालंदा में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। छोटे मुखिया के कांग्रेस में शामिल होने से नालंदा की सात विधानसभा सीटों- नालंदा, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा, हरनौत, बिहारशरीफ और अस्थावां पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। राजनीतिज्ञों और विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस इस अवसर का कैसे उपयोग करती है और क्या यह BJP-जद(यू) गठबंधन को चुनौती दे पाएगी।
