नालंदा में इस्लामपुर पुलिस की सेवा बन गई शिकायतों का अड्डा, पांच पुलिसकर्मी निलंबित

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में कानून-व्यवस्था की हिफाजत करने वाले ‘रक्षक’ ही अब ‘भक्षक’ साबित हो रहे हैं। इस्लामपुर थाने में जनता की सेवा करने के बजाय लापरवाही और बेरुखी का खेल चल रहा था, जिसकी भनक लगते ही पुलिस महकमे ने सख्ती दिखाई। पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है।
यह कार्रवाई न केवल थाने की छवि को झकझोर रही है, बल्कि आम लोगों में पुलिस के प्रति बढ़ती असंतोष की आग को और भड़का रही है। क्या यह निलंबन महज एक शुरुआत है या नालंदा पुलिस अब वाकई ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति पर अमल करेगी? आइए, इस घटना की परतें खोलते हैं।
मामला इस्लामपुर थाने का है, जहां पिछले कई महीनों से स्थानीय निवासियों की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही थीं। छोटी-मोटी चोरी, घरेलू झगड़े या फिर सड़क पर होने वाले विवादों की रिपोर्ट दर्ज कराने आने वाले लोग थाने से निराश ही लौट रहे थे।
इन शिकायतों की बाढ़ ने आखिरकार उच्च अधिकारियों की नींद उड़ा दी। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) हिलसा-02 ने इसकी गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए तथ्य चौंकाने वाले थे।
जांच में पाया गया कि थाने के प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक (पुअनि) और उनके सहयोगी पुलिसकर्मी कर्तव्य से कोसों दूर थे। रिपोर्ट दर्ज करने में देरी, गलत बयान लेना, और यहां तक कि पीड़ितों को धमकी भरे लहजे में ‘समझाना’ ये सब आम बात हो चुकी थी।
जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में साफ शब्दों में लिखा कि जनता का विश्वास पुलिस का सबसे बड़ा हथियार है, और इसे तोड़ना किसी भी सिपाही के लिए अपराध है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर नालंदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने कोई ढील नहीं बरती। तत्काल प्रभाव से पुअनि तौकिर खान, कांस्टेबल मोहम्मद आशिफ, लव कुमार सिंह, करण कुमार, और चालक सिपाही जीतू कुमार को निलंबित कर सामान्य जीवन यापन भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) पर भेज दिया गया।
यह कार्रवाई न केवल थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि पूरे जिले की पुलिस व्यवस्था को आईना दिखाती है। निलंबित पुलिसकर्मियों को अब विभागीय जांच का सामना करना पड़ेगा, और यदि दोषी पाए गए तो सख्त सजा से बचना मुश्किल होगा।
नालंदा एसपी ने कहा कि नालंदा पुलिस अपने पदाधिकारियों और कर्मचारियों के आचरण एवं कर्तव्यनिष्ठा के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है। किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनुशासनहीनता या जनता के साथ दुर्व्यवहार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि हर थाने को जनता का मित्र बनाया जाए, न कि शिकायतों का केंद्र।





