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राजगीर बर्मीज बौद्ध विहार के शताब्दी समारोह में दिखा अंतर्राष्ट्रीय संगम

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक नगरी राजगीर में स्थित बर्मीज बौद्ध विहार ने अपने गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण कर लिए। इस अवसर पर शनिवार को आयोजित भव्य शताब्दी समारोह ने राजगीर को श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिक चेतना के अद्भुत रंग में रंग दिया। देश-विदेश से आए सौ से अधिक वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक अवसर को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर दिया।

समारोह में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित बर्मीज बौद्ध विहार से आए भिक्षुओं ने विशेष सहभागिता की। वहीं नव नालंदा महाविहार डीम्ड यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत बौद्ध भिक्षु छात्रों की बड़ी उपस्थिति ने कार्यक्रम को युवा ऊर्जा और बौद्ध अध्ययन की निरंतर परंपरा से जोड़ा। श्रद्धालुओं और बौद्ध अनुयायियों के लिए यह क्षण ऐतिहासिक होने के साथ-साथ अत्यंत भावनात्मक भी रहा।

बताया गया कि राजगीर का यह बर्मीज बौद्ध विहार, भारत में सारनाथ के बाद स्थापित दूसरा बर्मीज बौद्ध विहार है। इसकी स्थापना वर्ष 1925 ईस्वी में वर्मा (वर्तमान म्यांमार) के महान बौद्ध भिक्षु भंते जयंत महाराज द्वारा की गई थी। भंते जयंत महाराज वर्ष 1923 में वर्मा से भारत आए थे और उन्होंने राजगीर में भगवान बुद्ध के अस्थि कलश पर इस विहार की आधारशिला रखी थी। सौ वर्षों बाद भी यह विहार बौद्ध इतिहास, साधना और आस्था का जीवंत केंद्र बना हुआ है।

इस अवसर पर बर्मीज बौद्ध विहार प्रबंधन समिति के महासचिव यू चोमिया ने कहा कि भारत में पहला बर्मीज बौद्ध विहार सारनाथ में स्थापित हुआ था, जबकि दूसरा राजगीर में। उन्होंने कहा कि यह विहार केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है।

शताब्दी समारोह में सारनाथ बर्मीज बौद्ध विहार के प्रमुख पुजारी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, काठमांडू, श्रावस्ती, वाराणसी, कुशीनगर, वैशाली, बोधगया, नालंदा और पटना सहित अनेक प्रमुख बौद्ध स्थलों से आए भिक्षुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान जापान, थाईलैंड, कंबोडिया और म्यांमार (बर्मा) से आए बौद्ध भिक्षुओं ने संयुक्त रूप से विशेष पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न किए, जिससे पूरा परिसर मंत्रोच्चार और ध्यान की गूंज से भर उठा।

सारनाथ बर्मीज बौद्ध विहार के प्रमुख बौद्ध भिक्षु ने अपने संबोधन में कहा कि राजगीर का यह बर्मीज बौद्ध विहार पिछले सौ वर्षों से भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेशों का प्रचार-प्रसार करता आ रहा है और आज भी विश्व को शांति, सद्भाव और मानवता का मार्ग दिखा रहा है।

समारोह में जापानी बौद्ध विहार के प्रमुख भिक्षु टी. ओकोनेगी, राजगीर के आध्यात्मिक संत डॉ. सुख नारायण सहित अनेक गणमान्य संत, भिक्षु और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। शताब्दी समारोह ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि राजगीर न केवल भारत, बल्कि विश्व के बौद्ध मानचित्र पर एक सशक्त आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

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