Home आधी आबादी चंडी में जीविका कैडरों का BPM के खिलाफ हंगामा, लगाए गंभीर आरोप

चंडी में जीविका कैडरों का BPM के खिलाफ हंगामा, लगाए गंभीर आरोप

Jeevika cadres create ruckus against BPM, make serious allegations
Jeevika cadres create ruckus against BPM, make serious allegations

हिलसा (नालंदा दर्पण)। चंडी प्रखंड में जीविका समूह की महिलाओं ने अपने ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर (BPM) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जीविका कैडरों ने बीपीएम पर मानसिक, आर्थिक और व्यवहारिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल है।

महिलाओं का कहना है कि बीपीएम द्वारा लगातार अपमानजनक व्यवहार, नौकरी से हटाने की धमकी और शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसके कारण कई कैडरों को मजबूरन अपना काम छोड़ना पड़ा है।

जीविका कैडरों ने बताया कि बीपीएम जितेंद्र चौरसिया द्वारा उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। नौकरी से निकालने की धमकी देना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। कई महिलाओं ने दावा किया कि बीपीएम ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कुछ कैडरों को अनुचित तरीके से निष्कासित भी किया है। इसके अलावा  दीदी की रसोई योजना में कार्यरत महिलाओं को भी बीपीएम द्वारा परेशान किया जा रहा है।

महिला कैडरों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि देर रात ड्यूटी करके जब हम घर लौटते हैं तो रास्ते में हमारे झोले की तलाशी ली जाती है। गाली-गलौज और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ता है। इससे हमारा आत्म-सम्मान आहत होता है। इन घटनाओं ने न केवल उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि उनके परिवारों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ा है।

आक्रोशित जीविका कैडरों ने एकजुट होकर सामूहिक रूप से एक पत्र तैयार किया है, जिसमें बीपीएम के कथित अत्याचारों का विस्तृत विवरण दिया गया है। इस पत्र को ईमेल के माध्यम से उच्च अधिकारियों को भेजा गया है, जिसमें निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है। कैडरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे स्वयं लिखित आवेदन लेकर संबंधित कार्यालयों का रुख करेंगी।

प्रदर्शन में शामिल सैकड़ों जीविका दीदियों ने बीपीएम के व्यवहार की कड़ी निंदा की। एक कैडर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम दिन-रात मेहनत करके समाज और अपने परिवार के लिए योगदान दे रही हैं, लेकिन बीपीएम का व्यवहार हमें तोड़ने का काम कर रहा है। हम अब चुप नहीं रहेंगी।

इस मामले में बीपीएम जितेंद्र चौरसिया से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका यह रवैया कैडरों के गुस्से को और भड़का सकता है।

बता दें कि जीविका समूह बिहार में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस कार्यक्रम के तहत महिलाएं विभिन्न योजनाओं जैसे दीदी की रसोई और अन्य सामुदायिक कार्यों में भाग लेती हैं।

यह मामला अब उच्च अधिकारियों के पास पहुंच चुका है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जीविका कैडरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने से पीछे नहीं हटेंगी। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर किया है।

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