जानें हिलसा में DPO और शिक्षक 20 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार का सच

हिलसा (नालंदा दर्पण)। बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। हिलसा में निगरानी विभाग की टीम ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अनिल कुमार और शिक्षक संजय कुमार को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई हिलसा के महंत विद्यानंदन इंटर कॉलेज में कमेटी गठन के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायत के आधार पर की गई। इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

सूत्रों के अनुसार महंत विद्यानंदन इंटर कॉलेज में कमेटी गठन के लिए डीपीओ अनिल कुमार और शिक्षक संजय कुमार ने एक शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये की नाजायज मांग की थी। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को दी। निगरानी विभाग ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई।

निगरानी की टीम ने एक जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम देने के लिए कहा। जैसे ही डीपीओ अनिल कुमार और शिक्षक संजय कुमार ने 20 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, निगरानी की टीम ने मौके पर छापेमारी कर दोनों को रंगे हाथों धर दबोचा। इस कार्रवाई में रिश्वत की रकम भी बरामद की गई।

निगरानी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद अनिल कुमार और संजय कुमार से पूछताछ शुरू कर दी गई है। अधिकारी ने कहा कि हम इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।

यह पता लगाया जाएगा कि क्या यह रिश्वतखोरी का इकलौता मामला था या इसमें और लोग भी शामिल हैं। आरोपियों को जल्द ही न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। निगरानी विभाग रिश्वत के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रहा है।

बता दें कि बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के मामले कोई नई बात नहीं हैं। हाल के वर्षों में कई अधिकारियों और शिक्षकों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। इन घटनाओं ने शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं और इसे खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

इस घटना के बाद हिलसा के स्थानीय लोगों और शिक्षक समुदाय में आक्रोश देखा जा रहा है। एक स्थानीय शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऐसे लोग शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल करते हैं। हम मेहनत से बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारी और शिक्षक पूरे विभाग को बदनाम कर देते हैं।

महंत विद्यानंदन इंटर कॉलेज के छात्रों और अभिभावकों ने भी इस घटना की निंदा की है। एक अभिभावक ने कहा कि हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए स्कूल पर भरोसा करते हैं, लेकिन जब स्कूल में ही भ्रष्टाचार हो, तो हम किस पर भरोसा करें?

हालांकि, बिहार सरकार और शिक्षा विभाग ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि विभाग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और जल्द ही उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।

निगरानी विभाग ने भी चेतावनी दी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी कार्रवाई जारी रहेगी। एक अधिकारी ने कहा कि हमारी टीम हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार है। कोई भी भ्रष्टाचारी बख्शा नहीं जाएगा।

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