इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक पत्र, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम लिखा गया है और वह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वायरल पत्र में इस्लामपुर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सत्यम प्रकाश और नालंदा के सिविल सर्जन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पत्र में न केवल भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के दावे किए गए हैं, बल्कि एक मरीज राधा देवी की मृत्यु को भी इस लापरवाही से जोड़ा गया है।
वायरल पत्र में इस्लामपुर पीएचसी के प्रभारी डॉ. सत्यम प्रकाश के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अनुचित नियुक्ति: पत्र के अनुसार डॉ. सत्यम प्रकाश को सिविल सर्जन नालंदा ने जिला पदाधिकारी को गुमराह करके प्रभारी बनाया, जबकि उन्होंने विभागीय परीक्षा और कोषागार प्रशिक्षण पास नहीं किया है। यह नियुक्ति कथित तौर पर आशा कार्यकर्ताओं की बहाली में भ्रष्टाचार के लिए की गई।
अनियमित उपस्थिति: डॉ. सत्यम प्रकाश प्रतिदिन सुबह 11 बजे पटना से कार्यालय पहुंचते हैं और दोपहर 3 बजे वापस चले जाते हैं, जिससे पीएचसी में आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती हैं।
वैक्सीन घोटाला और मृत्यु: 29 जुलाई 2025 को माहरो गौरैया गांव की राधा देवी को सांप ने काट लिया। पंचायत के मुखिया योगेश्वर यादव ने डॉ. सत्यम प्रकाश को सूचित किया, लेकिन उन्होंने पटना से फोन पर वैक्सीन अनुपलब्ध होने का बहाना बनाया।
जब ग्रामीणों ने पीएचसी में पूछताछ की तो ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने पहले वैक्सीन उपलब्ध होने की बात कही, फिर इन्कार कर दिया। स्टोर की जांच में पांच एंटी-स्नेक वेनम वैक्सीन मौजूद पाए गए, जिसका वीडियो ग्रामीणों ने बनाया। इस लापरवाही के कारण राधा देवी की निजी अस्पताल ले जाते समय मृत्यु हो गई।
सिविल सर्जन की मिलीभगत: पत्र में आरोप है कि सिविल सर्जन नालंदा ने डॉ. सत्यम प्रकाश के खिलाफ शिकायतों (15 जुलाई 2025 को सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा और 7 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे द्वारा जांच के आदेश) के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की।
राधा देवी की मृत्यु ने इस्लामपुर के ग्रामीणों में भारी आक्रोश पैदा किया है। पत्र में दावा किया गया है कि डॉ. सत्यम प्रकाश कीमती दवाओं को बेच रहे हैं, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में वैक्सीन उपलब्ध नहीं थी। ग्रामीणों ने स्टोर में वैक्सीन मौजूद होने का वीडियो फुटेज सार्वजनिक किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
पत्र में मांग की गई है कि डॉ. सत्यम प्रकाश को तत्काल प्रभारी पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। इसके अलावा यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि 10 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण अस्पताल परिसर का घेराव करेंगे और उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगे।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिला पदाधिकारी, नालंदा ने जांच की जिम्मेदारी सिविल सर्जन को सौंपी है, जो स्वयं इन आरोपों में संलिप्त हैं। इससे स्थानीय लोगों में जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हुआ है। जब सिविल सर्जन ही डॉ. सत्यम को बचा रहे हैं तो हम किससे न्याय की उम्मीद करें।
यह घटना नालंदा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करती है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि डॉ. सत्यम प्रकाश के प्रभारी बनने के बाद रविवार को आपातकालीन ड्यूटी आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सौंपी जा रही है, जो गंभीर चिकित्सा मामलों के लिए उपयुक्त नहीं है।
इस्लामपुर के निवासियों ने सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। यह पत्र पहले भी मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव और जिला पदाधिकारी को भेजा जा चुका है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। क्या यह वायरल पत्र सरकार को जगा पाएगा या यह एक और अनसुनी शिकायत बनकर रह जाएगा?
