नीजि छात्रावास में एलकेजी छात्र की पिटाई से मौत, जांच में जुटी पुलिस

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के राजगीर थाना क्षेत्र में स्थित अरुणोदय स्कूल के छात्रावास में एक 8 साल के मासूम छात्र दिलखुश कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। यह घटना उस समय सामने आई, जब स्कूल संचालक ने बच्चे के परिजनों को सूचित किया कि दिलखुश ने तीन मंजिला इमारत की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली।

हालांकि परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि बच्चे की मौत बेरहमी से पिटाई के कारण हुई। मृतक के शरीर पर पिटाई के निशान ने इस मामले को और रहस्यमय बना दिया है।

मृतक दिलखुश कुमार गया जिला के अतरी थाना क्षेत्र के चरवारा गांव निवासी स्व. चंदेश्वर प्रसाद यादव का पुत्र था। वह अरुणोदय स्कूल में एलकेजी का छात्र था और स्कूल के छात्रावास में रहता था।

दादा अनिल प्रसाद यादव ने बताया कि 11 सितंबर को उन्होंने अपने पोते का नामांकन छबिलापुर रोड स्थित इस स्कूल में करवाया था। नामांकन के बाद बच्चा खुश और उत्साहित था। लेकिन रविवार की सुबह करीब 3 बजे स्कूल के एक शिक्षक ने फोन कर दुखद खबर दी कि दिलखुश ने अपना बक्सा लेकर 40 फीट ऊंची छत से छलांग लगा दी है। जिसके बाद उसे विम्स (वर्धमान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) ले जाया गया। जहां उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने जब बच्चे का शव देखा तो उनके होश उड़ गए। शव पर कई जगह पिटाई के निशान थे, जो इस बात की ओर इशारा कर रहे थे कि बच्चे की मौत का कारण आत्महत्या नहीं, बल्कि कुछ और हो सकता है।

अनिल प्रसाद यादव ने कहा कि अगर बच्चा छत से कूदा होता तो उसके हाथ-पैर या शरीर की हड्डियां टूटतीं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पूरे शरीर पर पिटाई के निशान थे, जो साफ तौर पर बर्बरता की कहानी बयां कर रहे हैं।

दिलखुश की मौत की खबर सुनकर परिजन विम्स पहुंचे, जहां उनकी चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। बच्चे की मां अपने बेटे की लंबी उम्र के लिए जीतिया पर्व की तैयारियों में जुटी थीं, बेटे की लाश देखकर दहाड़े मारकर रोने लगीं। परिवार का दुख और भी गहरा है, क्योंकि कुछ साल पहले दिलखुश के पिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद परिवार की सहमति से मां ने अपने देवर से शादी की थी। दिलखुश इस परिवार की एकमात्र उम्मीद था।

मृतक के दादा अनिल प्रसाद यादव ने स्कूल संचालक अजय कुमार और अन्य के खिलाफ राजगीर थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने स्कूल संचालक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का सटीक कारण स्पष्ट होने की उम्मीद है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिवार को सौंप दिया गया है।

पुलिस ने जांच को और गहरा करने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) की टीम को मौके पर बुलाया, जिसने साक्ष्य एकत्र किए। इसके अलावा डॉग स्क्वायड की मदद भी ली गई। जांच में एक अहम तथ्य सामने आया है कि छात्रावास में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है, जिसके कारण स्कूल संचालक के दावों की पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है।

स्कूल संचालक अजय कुमार ने पुलिस को बताया कि रात में दिलखुश ने अपना बक्सा लिया और 40 फीट ऊंची छत से कूद गया। इसके बाद उसे तुरंत विम्स ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई। हालांकि पुलिस को इस दावे का कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है। संचालक की इस थ्योरी पर परिजनों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक 8 साल का बच्चा स्कूल में नया-नया आया था और खुश था। वह आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाएगा?

इस घटना ने अरुणोदय स्कूल के प्रबंधन और छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्रावास में सीसीटीवी कैमरों का अभाव और रात में बच्चे की गतिविधियों पर नजर न रख पाने की कमी ने प्रबंधन की लापरवाही को उजागर किया है। इसके अलावा बच्चे के शरीर पर पिटाई के निशान ने स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

दिलखुश की मौत की खबर फैलते ही स्थानीय समुदाय में आक्रोश फैल गया है। लोग स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।

फिलहाल पुलिस और एफएसएल की टीमें इस मामले की गहन जांच में जुटी हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के नतीजे इस मामले में सच्चाई को सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल यह मामला एक मासूम बच्चे की दुखद मौत के इर्द-गिर्द कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है। क्या यह आत्महत्या थी या हत्या? इसका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा।

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