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हिलसा में तीसरी बार उफनाई लोकाइन नदी, दर्जनों गांव डूबे, जनजीवन ठप

हिलसा (नालंदा दर्पण)। हिलसा अनुमंडल में प्रकृति का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दो महीनों में तीसरी बार लोकाइन नदी उफान पर है, जिसने इलाके को जलमग्न कर दिया है। एकंगरसराय, हिलसा और करायपरसुराय प्रखंड की आधा दर्जन पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं। तटबंधों के टूटने से घरों में पानी घुस गया है, सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं और ग्रामीणों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो चुकी है।

Lokain river overflows for the third time in Hilsa dozens of villages submerged normal life disrupted 2
Lokain river overflows for the third time in Hilsa, dozens of villages submerged, normal life disrupted

प्रशासन की ओर से राहत कार्य तो शुरू हुए, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह नाकाफी है। सांप-बिच्छू का खतरा बढ़ गया है, फसलें बर्बाद हो रही हैं और लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। यह बाढ़ न सिर्फ संपत्ति का नुकसान कर रही है, बल्कि किसानों की उम्मीदों को भी डुबो रही है।

लोकाइन नदी का जलस्तर बढ़ने से हिलसा प्रखंड के धुरी बिगहा गांव के पास पश्चिमी तटबंध में करीब 100 फुट का कटाव हो गया। इससे मिर्जापुर, कोरावां और चिकसौरा पंचायत के दर्जनों गांवों में पानी घुस गया। चार दिनों से गलियों और घरों में 4 से 5 फुट तक पानी बह रहा था। हालांकि अब ज्यादातर जगहों पर पानी दो फुट कम हो गया है। लेकिन कुछ नीचे इलाकों में अब भी घरों में 5 फुट से ज्यादा पानी जमा है।

इसी तरह एकंगरसराय प्रखंड के लाला बिगहा गांव के पास पूर्वी तटबंध टूटने से योगीपुर, असाढ़ी और रेंडी पंचायत के गांव पानी से घिर गए। पांच दिनों से ये इलाके जलप्रलय का सामना कर रहे हैं। प्रभावित गांवों की सूची लंबी है। धुरी बिगहा, छीयासठ बिगहा, फुलवरिया, लक्कड़ बीघा, कुसेता, डोमना बिगहा, मुरलीगढ़ सोहरापुर, जमुआरा, चमंडी, दामोदरपुर, गिलानीपर, बेलदारी बिगहा, हरिहर खंधा, हरबंशपुर, चिकसौरा, मिर्जापुर, मराची, लुच्चन टोला जैसे गांव अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि संपर्क मार्गों पर 2 से 3 फुट पानी बह रहा था, जो अब 1 से 2 फुट रह गया है। लेकिन आवागमन अभी भी मुश्किल है। हम सरकारी राहत की आस में बैठे हैं, लेकिन न तो भोजन की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही पशुओं के लिए चारे की। प्रशासन ने सूखा खाना बांटा है, लेकिन यह काफी नहीं है।

बाढ़ ने न सिर्फ घरों को डुबोया, बल्कि खतरे भी बढ़ा दिए हैं। गिलानीपुर, बेलदारी बिगहा, धुरी बिगहा, सोहरापुर, छीयासठ बिगहा, कुसेता, मड़वा और हसनपुर जैसे गांवों में सांप-बिच्छू जगह-जगह दिख रहे हैं। शनिवार सुबह से पानी घुसा है और अब तक प्रशासन ने भोजन की व्यवस्था नहीं की है। गांव चारों तरफ से पानी से घिरे हैं, और गलियों में 4-5 फुट पानी है।

किसानों की हालत सबसे दयनीय है। हसनपुर के किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से टमाटर की फसल बर्बाद हुई, जून में बाढ़ से गर्मा धान, धान की रोपाई और मूंगफली खराब हो गई। जुलाई में दोबारा बाढ़ आई और अब शनिवार को तीसरी बार पानी ने सब कुछ तबाह कर दिया। कई किसानों ने रिश्तेदारों से धान की मोरी लाकर दोबारा रोपाई की, लेकिन वह सब डूब गया।

सिर्फ लोकाइन ही नहीं, महतवाइन नदी में सदरपुर गांव के पास 30 फुट तटबंध टूटने से सदरपुर, मुशाढ़ी, फतेहपुर, कमर, खोखना, सबचक और बैरीगंज गांव बाढ़ में घिर गए। वहीं, वरगी अरहा कड़रुआ नदी में अब्बुपुर गांव के पास 40 फुट खाड़ हो जाने से सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई। अब्बुपुर, चमटोली, अशियापर, जियनचक, खवाजपुर, चंदूटोला, महद्दीनगर, मेदनीचक, बाजीदपुर और बेरथ गांव प्रभावित हैं। दर्जनों घरों में पानी घुसा है।

ग्रामीणों ने बताया कि जून में तटबंध टूटा था, हमने डेढ़ लाख रुपये चंदा कर मरम्मत की, लेकिन जुलाई में फिर टूट गया। गांव नीचे होने से पानी निकलना मुश्किल है। योगीपुर पंचायत के गन्नीपुर गांव में कोई सरकारी भवन नहीं है। यहां तक कि मतदान भी झोपड़ी में होता है। बाढ़ ने यहां जीवन यापन को और कठिन बना दिया।

हिलसा नगर परिषद क्षेत्र में भी बुधवार को बाढ़ का पानी घुसा, जो करीब 10 साल बाद हुआ है। मई गांव, अर्जुन टोला, ढिवरापर, दक्षिणी पटेल नगर, द्वारिका नगर और ब्लॉक कॉलोनी जैसे मोहल्लों में पानी फैल गया। कई घरों में पानी घुसा, और सरदार पटेल कॉलेज व पशु अस्पताल जाने वाली सड़कें डूबी हुई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह अप्रत्याशित है और प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है। नालंदा दर्पण से बात करते हुए एक प्रभावित ने कहा कि राहत कार्य चलाए जा रहे हैं, लेकिन अपर्याप्त हैं। महीने में तीसरी बाढ़ ने इलाके में भारी तबाही मचाई है। हमें भोजन, चारा, चिकित्सा और सुरक्षित स्थान की जरूरत है। सांप-बिच्छू से बचाव के लिए भी कुछ किया जाए।

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Lokain river overflows for the third time in Hilsa, dozens of villages submerged, normal life disrupted

हालांकि प्रशासन का कहना है कि राहत टीमों को तैनात किया गया है, लेकिन ग्रामीणों की शिकायतें बताती हैं कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यह बाढ़ न सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा है, बल्कि तटबंधों की कमजोरी और जल निकासी की कमी को भी उजागर कर रही है। अगर समय रहते उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।

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