चंडी (नालंदा दर्पण)। थरथरी प्रखंड के भतहर गांव स्थित सुशीला चमेली आयुर्वेदिक अस्पताल आज एक दर्दनाक हकीकत का गवाह बना हुआ है। यह भवन कभी लोगों की सेहत का आधार था। लेकिन अब एक तबेला में तब्दील हो चुका है।
इसकी जर्जर दीवारों और टूटी-फूटी छत के बीच ग्रामीण अपनी गाय-भैंस और बकरियों को बांधते नजर आते हैं। इस अस्पताल में दशकों से किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। इस कारण यह भवन उपेक्षा का शिकार हो गया।
करीब 30 डिसमिल रकबे में फैले इस परिसर पर अतिक्रमण की मार भी पड़ी है और चारों ओर अव्यवस्था का मंजर दिखाई देता है। कुछ साल पहले विधायक ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्पताल कभी उनके लिए उम्मीद की किरण था, लेकिन आज यह स्थिति देखकर उनकी निराशा साफ झलकती है।
क्या यह महज एक इमारत की कहानी है या यह हमारे स्वास्थ्य ढांचे की बड़ी तस्वीर को दर्शाता है? क्या समय रहते इसकी सुध ली जा सकती है या यह भवन इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगा?
