नाबालिग प्रेमी-प्रेमिका ने औंगारी धाम सूर्य मंदिर में रचाई शादी!

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। एक अनोखी और चर्चित प्रेम कहानी ने इस्लामपुर थाना क्षेत्र में हलचल मचा दी है। 14 साल की लड़की और 16 साल के लड़के ने औंगारी धाम सूर्य मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर शादी रचा ली। यह घटना न केवल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है, बल्कि सामाजिक और कानूनी सवालों को भी जन्म दे रही है।

यह कहानी पटना जिले के एक गांव की 14 वर्षीय नाबालिग लड़की और इस्लामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव के 16 वर्षीय नाबालिग लड़के की है। दोनों के बीच प्रेम का रिश्ता कब और कैसे परवान चढ़ा, यह तो वही बेहतर जानते हैं। लेकिन उनकी यह प्रेम कहानी उस समय सुर्खियों में आई, जब दोनों ने औंगारी धाम सूर्य मंदिर में विवाह रचाने का फैसला किया। मंदिर के पवित्र वातावरण में भगवान को साक्षी मानकर इस नाबालिग जोड़े ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।

शादी के बाद नाबालिग प्रेमी अपनी नवविवाहिता दुल्हन को लेकर अपने घर पहुंचा। इस घटना ने गांव में हलचल मचा दी। सबसे रोचक बात यह है कि प्रेमी की मां ने अपनी नाबालिग बहू को स्वीकार करने की सहमति दे दी है।

दूसरी ओर नाबालिग प्रेमिका की मां ने अभी तक स्पष्ट रूप से सहमति नहीं दी है, लेकिन वह पूरी तरह से इस रिश्ते के खिलाफ भी नहीं दिख रही हैं। सूत्रों के अनुसार वह समय के साथ इस रिश्ते को स्वीकार करने की ओर अग्रसर हैं। नाबालिग लड़की ने भी अपने पति के साथ रहने की इच्छा जाहिर की है, जिससे यह मामला और भी जटिल हो गया है।

यह घटना भले ही प्रेम और समर्पण की कहानी लगती हो, लेकिन यह कई सामाजिक और कानूनी सवालों को भी जन्म दे रही है। नाबालिगों की शादी भारत में कानूनन मान्य नहीं है।

भारतीय कानून के अनुसार लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। ऐसे में इस नाबालिग जोड़े की शादी ने स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों का ध्यान खींचा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला प्रेम और सामाजिक मान्यताओं के बीच टकराव का प्रतीक है। एक ओर जहां युवा जोड़े का प्रेम और उनके परिवारों की आंशिक सहमति इस कहानी को रोमांटिक बनाती है। वहीं दूसरी ओर कानूनी पेचीदगियां इस मामले को जटिल बना रही हैं। कुछ लोग इसे प्रेम की जीत मान रहे हैं तो कुछ इसे सामाजिक-कानून नियमों का उल्लंघन बता रहे हैं।

इस्लामपुर और आसपास के गांवों में यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया है। लोग इस नाबालिग जोड़े की हिम्मत और उनके प्रेम की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन साथ ही इस बात पर भी बहस हो रही है कि क्या इतनी कम उम्र में शादी का फैसला सही है। कुछ बुजुर्गों का कहना है कि बच्चों को अभी अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। जबकि कुछ युवा इस प्रेम कहानी को एक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।

इस मामले में अब स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों की भूमिका अहम होगी। यह देखना बाकी है कि क्या इस जोड़े को उनके परिवार और समाज का समर्थन मिलेगा या फिर कानूनी कार्रवाई के तहत इस शादी को अमान्य घोषित किया जाएगा। फिलहाल यह नाबालिग जोड़ा अपने प्रेम और विश्वास के बल पर एक नई जिंदगी की शुरुआत करने को तैयार है।

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