बिहार विधानसभा में गूंजा नालंदा बेंच-डेस्क खरीद घोटाला, आरडीडीई के कार्यकाल की होगी जांच

जदयू विधायक जितेन्द्र कुमार ने उठाया सवाल- दोषी अफसर को सजा की जगह प्रमोशन क्यों?

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में कथित बेंच-डेस्क खरीद घोटाला का मामला अब बिहार विधानसभा तक पहुंच गया है। अस्थावां से जदयू विधायक जितेंद्र कुमार ने प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये के घोटाले में दोषी पाए गए तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को सजा देने के बजाय पटना प्रमंडल का आरडीडीई (क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक) बना दिया गया। उन्होंने इसे भ्रष्ट अफसर को इनाम देने जैसा बताया।

विधानसभा में यह मुद्दा उठते ही सदन का माहौल गरमा गया। विधायक जितेंद्र कुमार ने कहा कि नालंदा में बेंच-डेस्क खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई थीं। जिला निगरानी समिति की जांच में तत्कालीन डीईओ की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी और दोष सिद्ध होने के बावजूद उन्हें उच्च पद पर पदस्थापित कर दिया गया।

मंत्री को दी गई भ्रामक जानकारीः प्रश्नकाल के दौरान विधायक ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों ने शिक्षा मंत्री को भ्रामक जानकारी दी है। उनका कहना था कि नालंदा में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट स्पष्ट रूप से अनियमितताओं की ओर इशारा करती है। फिर भी संबंधित अधिकारी के खिलाफ अपेक्षित कड़ी कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि जब जिला निगरानी समिति ने दोष सिद्ध कर दिया, तब भी उन्हें रिवॉर्ड के तौर पर पटना प्रमंडल का आरडीडीई बना दिया गया। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति पर सवाल खड़ा करता है।

शिक्षा मंत्री का जवाब- सख्त कार्रवाई हुई हैः इस पर शिक्षा मंत्री ने सदन में जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि पूर्व में जो भी जिला शिक्षा पदाधिकारी दोषी पाए गए थे, उनके खिलाफ विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। मंत्री ने बताया कि संबंधित मामलों में केस दर्ज किया गया और निलंबन की कार्रवाई भी की गई है।

हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा कि विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यालय स्तर पर विभाग के निदेशक से इस पूरे मामले की पुनः जांच कराई जाएगी, ताकि यदि किसी स्तर पर चूक हुई हो तो उसे दुरुस्त किया जा सके।

जांच के दायरे में आएगा पूरा कार्यकालः सूत्रों के अनुसार अब नालंदा में उनके जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में पूरे कार्यकाल की समीक्षा की जा सकती है। बेंच-डेस्क खरीद प्रक्रिया, टेंडर आवंटन, आपूर्ति और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच संभावित है। यदि जांच में अनियमितताएं दोबारा प्रमाणित होती हैं तो विभागीय कार्रवाई और कठोर हो सकती है।

शिक्षा व्यवस्था पर असरः नालंदा जैसे शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण जिले में बेंच-डेस्क खरीद में कथित घोटाले की खबर ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पहले से ही चिंता का विषय रही है।

ऐसे में यदि संसाधनों के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाः विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल भी इस मामले को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर सकते हैं। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच भी जांच की संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है।

अब नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यालय स्तर की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या वास्तव में दोषियों पर निर्णायक कार्रवाई होती है या नहीं।

समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट

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