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National Lok Adalat loan settlement : बैंक मैनेजर को लाठी-डंडे से पीटा, 15 हजार का केसीसी लोन 15 साल में हुआ 48 हजार

Bank manager assaulted Nalanda

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के बिंद थाना क्षेत्र के जखौर गांव में बैंक ऋण वसूली (National Lok Adalat loan settlement) से जुड़ा एक विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। लोक अदालत (Lok Adalat) की नोटिस देने पहुंचे बिहार ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक और उनके सहयोगी के साथ दो भाइयों ने कथित रूप से लाठी-डंडे से मारपीट कर दी। घटना के बाद बैंक प्रबंधक ने दोनों आरोपितों के खिलाफ थाना में लिखित शिकायत दी है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार ग्रामीण बैंक की अमावां शाखा के शाखा प्रबंधक रवि रंजन कुमार ने बताया कि करीब 15 वर्ष पहले जखौर गांव निवासी प्रभु केवट के पुत्र सुनील कुमार और अनिल केवट ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत 15-15 हजार रुपये का कृषि ऋण लिया था। समय पर भुगतान नहीं होने के कारण ब्याज और दंडात्मक शुल्क जुड़ते गए और वर्ष 2021 तक यह राशि बढ़कर लगभग 48-48 हजार रुपये हो गई।

लोक अदालत के लिए नोटिस देने गए थे बैंक अधिकारीः शाखा प्रबंधक के अनुसार बैंक ने ऐसे ऋण खातों को निपटाने के लिए आगामी 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में मामला रखने का निर्णय लिया था। इसी प्रक्रिया के तहत बीते दिन लगभग 11 बजे वह अपने सहयोगी के साथ जखौर गांव पहुंचे थे, ताकि दोनों ऋणियों को नोटिस देकर लोक अदालत में उपस्थित होने की सूचना दी जा सके।

उन्होंने बताया कि नोटिस देने के दौरान दोनों भाइयों ने पहले गाली-गलौज की और उसके बाद लाठी-डंडे से हमला कर दिया। किसी तरह दोनों बैंककर्मी वहां से भागकर अपनी जान बचाने में सफल हुए। बैंक मैनेजर का आरोप है कि आरोपितों ने जाते समय यह भी धमकी दी कि यदि वे दोबारा गांव में दिखाई दिए तो गोली मार दी जाएगी।

पहले भी हो चुका है विवादः बैंक प्रबंधन का कहना है कि कुछ माह पहले भी जब ऋण चुकाने के लिए दोनों भाइयों से संपर्क किया गया था, तब भी उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। इस बार लोक अदालत के नोटिस को लेकर विवाद अचानक हिंसक हो गया।

पुलिस ने शुरू की जांचः बिंद थाना अध्यक्ष चंदन कुमार सिंह ने बताया कि बैंक मैनेजर द्वारा दो लोगों के खिलाफ मारपीट और धमकी देने की शिकायत दी गई है। मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

केसीसी लोन और बढ़ते एनपीए का सवालः इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे कृषि ऋणों के बढ़ते बकाये और बैंक-ग्राहक संबंधों की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। किसान क्रेडिट कार्ड योजना का उद्देश्य किसानों को आसान कृषि ऋण उपलब्ध कराना है, लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने पर ब्याज बढ़ने से छोटी राशि भी कई वर्षों में काफी बड़ी हो जाती है।

बैंक अधिकारियों के अनुसार लोक अदालत ऐसे मामलों के समाधान का एक वैकल्पिक मंच है, जहां दोनों पक्ष आपसी सहमति से ऋण विवाद का निपटारा कर सकते हैं। हालांकि जखौर गांव की घटना यह भी दर्शाती है कि ऋण वसूली की प्रक्रिया कई बार सामाजिक तनाव और टकराव का कारण बन जाती है। समाचार स्रोतः नालंदा दर्पण/ मीडिया रिपोर्टस्

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