अब पावापुरी जलमंदिर से नवादा तक बिछेगी नई रेललाइन

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के पावापुरी जलमंदिर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना अब नए सिरे से गति पकड़ रही है। हालांकि पहले प्रस्तावित बिहारशरीफ के पावापुरी रोड स्टेशन से जलमंदिर को जोड़ने की योजना पर फिलहाल विराम लग गया है। अब पावापुरी जलमंदिर को नवादा से जोड़ने के लिए नई रेललाइन बिछाने की तैयारी है। इस 23 किलोमीटर लंबे रेलखंड के लिए 500 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है, जिसे जल्द ही पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को भेजा जाएगा।
इस प्रस्तावित रेलखंड में 17.5 किलोमीटर हिस्सा नवादा जिले में और मात्र 5.5 किलोमीटर हिस्सा नालंदा जिले में होगा। इस रेललाइन पर केवल एक स्टेशन होगा, जिससे परियोजना की लागत को 500 करोड़ रुपये तक सीमित रखा गया है।
रेल निर्माण संभाग ने इस डीपीआर को अंतिम रूप देने के बाद इसे स्वीकृति के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रेलखंड का निर्माण न केवल लागत प्रभावी है, बल्कि यह क्षेत्र के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से भी लाभकारी सिद्ध होगा।
पहले की योजना में बिहारशरीफ को नवादा से जोड़ने के लिए 1,420 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली रेललाइन प्रस्तावित थी। यह राशि वर्ष 2022 की डीपीआर से करीब 400 करोड़ रुपये अधिक थी। उस समय कुल लागत 10 अरब 7 करोड़ 58 लाख 70 हजार रुपये आंकी गई थी।
हालांकि, नई डीपीआर में लागत को काफी कम कर 500 करोड़ रुपये तक सीमित किया गया है, जिसे महाप्रबंधक स्तर पर ही स्वीकृत किया जा सकता है। इससे परियोजना को शीघ्र शुरू करने में मदद मिलेगी।
बता दें कि पावापुरी भगवान महावीर की महापरिनिर्वाण भूमि के रूप में जैन धर्मावलंबियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस रेलखंड के बनने से जैन तीर्थयात्रियों को पावापुरी और नवादा आने-जाने में सुविधा होगी, जिससे तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा।
सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2042 तक इस रेलखंड पर यात्रियों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों की आय में वृद्धि होगी।
नालंदा जिले में वर्तमान में बख्तियारपुर-तिलैया, बिहारशरीफ-दनियावां, और फतुहा-इस्लामपुर जैसे तीन रेलखंड संचालित हैं। इसके अलावा बिहारशरीफ-बरबीघा-शेखपुरा रेलखंड का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। नई रेललाइन के निर्माण से नालंदा और नवादा के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
रेलवे के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार नई डीपीआर को जल्द से जल्द स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा। इस परियोजना को केंद्र सरकार की पावापुरी को रेल नेटवर्क से जोड़ने की घोषणा को अमलीजामा पहनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तीन साल पहले हुए सर्वे में भी इस रेलखंड को लाभकारी बताया गया था और वर्तमान सर्वे ने भी इसके आर्थिक और सामाजिक लाभों की पुष्टि की है।





