अब होटलों और घरों में ड्रोन से होगी मछली की डिलीवरी

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार में अब मछली की डिलीवरी का तरीका बदलने वाला है। राज्य सरकार ने होटलों और घरों तक ड्रोन के माध्यम से ताजी मछली पहुंचाने की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है।

इस योजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है और स्वीकृति मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा। इस पहल से न केवल मछली की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित होगी, बल्कि मत्स्य पालन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।

पशु व मत्स्य संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाइव ट्रायल पिछले साल 19 अक्टूबर को पटना के ज्ञान भवन में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। ट्रायल में तीन अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शित किया गया कि ड्रोन के जरिए मछली कैसे पहुंचाई जा सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक न केवल मछली डिलीवरी के लिए उपयोगी होगी, बल्कि मछुआरों और मत्स्य पालन से जुड़े अन्य कार्यों में भी सहायक सिद्ध होगी।

ड्रोन तकनीक का उपयोग केवल मछली डिलीवरी तक सीमित नहीं रहेगा। विभाग ने इसके अन्य उपयोगों की भी योजना बनाई है, जिसमें आपातकालीन सहायता: नदियों और तालाबों में मछुआरों के लिए संकट के समय ड्रोन के जरिए लाइफ जैकेट पहुंचाना, तालाबों और जलाशयों में मछलियों के लिए भोजन की आपूर्ति, ड्रोन की मदद से मछलियों में होने वाली बीमारियों की निगरानी और पहचान शामिल हैं।

बता दें कि बिहार में मछली उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 में राज्य में मछली उत्पादन 4.8 लाख टन था, जो 2023-24 में बढ़कर 8.73 लाख टन तक पहुंच गया है।

यह लगभग दोगुनी वृद्धि दर्शाता है। वर्तमान में राज्य की 60 फीसदी आबादी के लिए प्रति व्यक्ति 11.26 किलोग्राम मछली उपलब्ध है। यह उपलब्धता न केवल स्थानीय मांग को पूरा कर रही है, बल्कि मछली आधारित व्यवसायों को भी बढ़ावा दे रही है।

पशु व मत्स्य संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है। प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। वर्तमान में तटीय राज्यों में ड्रोन के माध्यम से मछली डिलीवरी की शुरुआत हो चुकी है, और बिहार इस दिशा में अग्रणी बनने की तैयारी में है।

इस योजना के लागू होने से न केवल उपभोक्ताओं को ताजी मछली आसानी से उपलब्ध होगी, बल्कि मछुआरों और मत्स्य पालन से जुड़े व्यवसायों को भी नई दिशा मिलेगी। ड्रोन तकनीक के उपयोग से समय और लागत में कमी आएगी, साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मछली की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

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