अब NEET UG, JEE Main जैसे प्रवेश परीक्षाओं के सवालों की समीक्षा होगी

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नीट यूजी (NEET UG), जेइइ मेन (JEE Main) जैसे प्रवेश परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवालों की गहन समीक्षा की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि इन परीक्षाओं में केवल 11वीं और 12वीं कक्षा के स्तर के प्रश्न ही पूछे जाएं, जो पूरी तरह से एनसीइआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित होंगे। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया है।
यह कमेटी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों का विस्तृत अध्ययन करेगी। यह जांच की जाएगी कि प्रश्न 11वीं और 12वीं के सिलेबस के अनुरूप हैं या नहीं। प्रश्नों का स्तर बहुत कठिन तो नहीं है और क्या छात्र इन्हें हल कर पा रहे हैं। हर साल पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार और उनके स्कोरिंग पैटर्न का अध्ययन। कई शिफ्टों में आसान और कठिन प्रश्नों की शिकायतों का समाधान।
कमेटी सभी डेटा का विश्लेषण करने के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी, जिसमें प्रश्नों के कठिनाई स्तर को संतुलित करने और सिलेबस से बाहर के प्रश्नों को हटाने पर जोर होगा।
पिछले कुछ वर्षों में छात्रों ने बार-बार शिकायत की है कि विभिन्न शिफ्टों में प्रश्नों के कठिनाई स्तर में भारी असमानता होती है। कुछ शिफ्टों में प्रश्न आसान होते हैं। जबकि अन्य में बहुत कठिन, जिससे छात्रों को असमान अवसर मिलते हैं। इस बार नीट यूजी 2025 का पेपर विशेष रूप से कठिन होने की वजह से छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि कमेटी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रवेश परीक्षाओं में केवल एनसीइआरटी आधारित और 11वीं-12वीं स्तर के प्रश्न ही पूछे जाएं। छात्र जो पढ़ रहे हैं, उसी आधार पर प्रश्न तैयार किए जाएं। ताकि उन्हें अनुचित कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
कमेटी की सिफारिशों के आधार पर जेइइ मेन, नीट यूजी और सीयूइटी यूजी जैसी प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नों की प्रक्रिया में बदलाव की उम्मीद है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन परीक्षाओं के प्रश्न पूरी तरह से 12वीं के सिलेबस पर आधारित होंगे। इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की जाएगी। जिसमें प्रश्नों का पैटर्न, मार्किंग स्कीम, प्रश्नों के प्रकार, प्रश्नों की संख्या शामिल होंगे।
इस पहल से लाखों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो हर साल इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। एनसीइआरटी आधारित प्रश्नों पर जोर देने से छात्रों को अपनी स्कूली पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने का मौका मिलेगा और कोचिंग पर उनकी निर्भरता कम हो सकती है।
कमेटी की रिपोर्ट और सिफारिशें जल्द ही शिक्षा मंत्रालय को सौंपी जाएंगी। जिसके बाद इन बदलावों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह कदम न केवल परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाएगा, बल्कि छात्रों के लिए तनाव को भी कम करेगा।





