अब नालंदा के इन 26 सरकारी स्कूलों में खुलेंगे मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण संवाददाता)। नालंदा जिले के 26 चयनित विद्यालयों में अब मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जो न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है, बल्कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी एक अनूठी पहल है।

इस अभिनव योजना के तहत स्कूली बच्चे स्वयं मिट्टी की जांच करेंगे और मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार करेंगे, जिससे वे मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों की स्थिति और पर्यावरणीय महत्व को समझ सकेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को कृषि विज्ञान से जोड़ना, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करना और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना है।

इस योजना को कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (केविके), आत्मा परियोजना और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में लागू किया जा रहा है। इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को मिट्टी की गुणवत्ता का विश्लेषण करने, पोषक तत्वों की पहचान करने और उनके महत्व को समझने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

डीपीओ समग्र शिक्षा मो. शाहनवाज के अनुसार यह पहल न केवल छात्रों की प्रयोगात्मक शिक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगी। स्कूली बच्चे अपने क्षेत्र की मिट्टी का विश्लेषण कर किसानों को व्यावहारिक जानकारी प्रदान करेंगे, जिससे मृदा सुधार और सतत खेती को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अतिरिक्त यह योजना पर्यावरण शिक्षा को एक नया आयाम प्रदान करेगी। बच्चों को मिट्टी के सैंपल की जांच, डाटा संकलन, विश्लेषण और निष्कर्ष निकालने की वैज्ञानिक पद्धति सिखाई जाएगी। इससे न केवल उनकी वैज्ञानिक समझ विकसित होगी, बल्कि वे अपने समुदाय को मिट्टी की देखभाल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में भी सक्षम होंगे।

इस कार्यक्रम में 7वीं से 11वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। उन्हें मिट्टी की जांच करने, पोषक तत्वों की कमी को समझने और उसके समाधान के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। बच्चों को प्रयोगशालाओं में मिट्टी के सैंपल की जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।

यह प्रक्रिया उन्हें न केवल तकनीकी कौशल सिखाएगी, बल्कि पर्यावरण और कृषि के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी बढ़ाएगी। बच्चे अपने परिवार और समुदाय को मिट्टी की उचित देखभाल के बारे में सलाह दे सकेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का प्रसार होगा।

इस योजना के तहत नालंदा जिले के निम्नलिखित 26 विद्यालयों को चुना गया है। जिनमें केंद्रीय विद्यालय राजगीर और हरनौत, विष्णुपुर – लोहंडा, बलधा, नीरपुर सिलाव, सुपासंग, गोपालगंज, अंडवस, बेना, आदर्श, डीएन एकंगरसराय, कटौना, नेफा बेन, दहपर-सरगांव, देकवाहा-सरैया, पमारा, त्रिभुवनबिगहा, नेरुत, टाउन बिहारशरीफ, हाजी नसिरुद्दीन गिरियक, करायपरसुराय, भतहर, हरनौत, पेशौर, अमरावती और दशरथपुर हाईस्कूल शामिल किए गए हैं।

इन विद्यालयों में स्थापित होने वाली प्रयोगशालाएं न केवल शैक्षिक उद्देश्यों को पूरा करेंगी, बल्कि बच्चों को कृषि विशेषज्ञों की तरह सोचने और मृदा सुधार के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी।

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