बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अब सरकारी स्कूलों में छात्रों की हाजिरी लगाने का तरीका पूरी तरह से बदलने वाला है। नालंदा जिले के साथ-साथ राज्य के अन्य कई जिलों में अब विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति टैबलेट के माध्यम से ‘फेसियल रिकॉग्निशन बेस्ड ऑथेंटिकेशन सिस्टम’ (Facial Recognition Based Authentication System) से दर्ज की जाएगी। यह कदम शिक्षा विभाग की ओर से पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण तकनीकी नवाचार है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) आनंद विजय के अनुसार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के निर्देशानुसार, राज्य के सभी सरकारी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति इसी आधुनिक प्रणाली से दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए ‘इनर्टोलैब आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ एजेन्सी का चयन किया गया है। एजेन्सी ने पहले चरण में राज्य के छह जिलों पटना, नालंदा, वैशाली, जहानाबाद, सारण एवं भोजपुर के पांच-पांच विद्यालयों की कक्षा 03 में अध्ययनरत विद्यार्थियों के साथ टैबलेट के माध्यम से ऑनलाइन दैनिक उपस्थिति दर्ज कराने का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा किया है।
अब, एजेन्सी के माध्यम से राज्य के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों की फेसियल रिकॉग्निशन आधारित उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। हाल ही में राज्य स्तर पर एजेन्सी और सीएसएम टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधियों के बीच इस योजना को सभी सरकारी विद्यालयों में लागू करने की तैयारी के लिए विमर्श बैठक भी आयोजित की गई थी।
इस पूरी प्रक्रिया के सुचारु संचालन के लिए जिला स्तर पर एसएसए (SSA) के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है।
प्रमंडल स्तर पर समन्वय के लिए एजेन्सी द्वारा 09 तकनीकी कार्मिकों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जो प्रमंडल के सभी जिलों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी सरकारी विद्यालयों में छात्रों की दैनिक उपस्थिति दर्ज कराने का कार्य पूर्ण कराएंगे।
इसके अलावा इस संपूर्ण प्रणाली के अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में जिला एमआईएस प्रभारी, जिला गुणवत्ता शिक्षा समन्वयक, जिला ई-शिक्षाकोष दल तथा अन्य संबंधित पदाधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने एजेन्सी को निर्देश दिया है कि वह शिक्षकों और संबंधित कर्मियों के प्रशिक्षण संबंधी कार्य को ससमय पूर्ण कराने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करें। इस नई तकनीक के लागू होने से सरकारी विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति की प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी होने की उम्मीद है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा।
