Home आधी आबादी अब ऐसे डीजे-आर्केस्ट्रा मालिक-आयोजक को होगी जेल, SPO लागू

अब ऐसे डीजे-आर्केस्ट्रा मालिक-आयोजक को होगी जेल, SPO लागू

Now such DJ-orchestra owner-organizer will be jailed, SPO implemented
Now such DJ-orchestra owner-organizer will be jailed, SPO implemented

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। शादी-ब्याह और मेलों की चकाचौंध में पिंजरे जैसे वाहनों या अस्थायी मंचों पर नाचती बच्चियां और लाउडस्पीकर पर बजते फूहड़, द्विअर्थी गीत बिहार में वर्षों से आम दृश्य रहे हैं। लोक मनोरंजन के नाम पर विकसित हुई आर्केस्ट्रा-थियेटर संस्कृति अब कानून के शिकंजे में आ चुकी है।

बिहार सरकार ने इस प्रवृत्ति को मानव तस्करी और यौन शोषण की श्रेणी में मानते हुए सख्त कदम उठाए हैं। नाबालिग लड़कियों के शोषण को रोकने के लिए पहले से मौजूद कानूनों को और प्रभावी बनाने के लिए जून 2025 से पूरे राज्य में एक मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) लागू कर दी गई है। जिसके तहत डीजे और आर्केस्ट्रा अब पुलिस की सीधी निगरानी में होंगे।

अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों, रेंज आईजी और डीआईजी को मानव तस्करी रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत सभी थानों को अपने क्षेत्र में संचालित आर्केस्ट्रा, मेला-थियेटर और डांस ग्रुप की सूची तैयार करने का आदेश दिया गया है। आयोजकों को लिखित घोषणा देनी होगी कि उनके किसी भी कार्यक्रम में नाबालिग लड़कियां प्रदर्शन नहीं करेंगी।

हर तीन महीने में थानों को समीक्षा बैठक करनी होगी और जहां नाबालिगों के उपयोग की आशंका हो, वहां छापेमारी कर पीड़ितों को मुक्त कराया जाएगा। थानाध्यक्षों को यह भी निर्देश दिया गया है कि यदि उन्हें किसी आयोजन में नाबालिग लड़की के नृत्य या प्रदर्शन की सूचना मिले तो वे तत्काल मुक्ति-दल बनाकर कार्रवाई करें।

इस दौरान आईटीपीए-1956 अधिनियम के प्रावधानों के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिसमें छापेमारी के दौरान महिला अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

आर्केस्ट्रा, मेला-थियेटर और डांस ग्रुपों द्वारा नाबालिगों की तस्करी या यौन शोषण को रोकने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर भी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा। जिलाधिकारियों को पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, स्थानीय एनजीओ और पुलिस प्रतिनिधियों को मिलाकर ग्राम स्तरीय मानव-व्यापार विरोधी निकाय का गठन करने का निर्देश दिया गया है। ये इकाइयां आर्केस्ट्रा और डांस ग्रुपों में शामिल नाबालिगों की पहचान में मदद करेंगी और समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगी।

जिला स्तरीय मानव-व्यापार निरोध इकाई (एएचटीयू) को भी प्रभावी भूमिका निभाने के लिए सक्रिय किया गया है। यह इकाई प्रभावित स्थलों की पहचान, पीड़ितों की मुक्ति, पुनर्वास और आरोपियों के खिलाफ त्वरित अभियोजन सुनिश्चित करेगी।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन शोषण व मानव तस्करी से जुड़े अपराधों के लिए अब कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है-

महिला की लज्जा भंग करने पर तीन साल तक की जेल।

नाबालिग को वेश्यावृत्ति में ढकेलने पर 10 साल की सजा।

बच्चों की खरीद-फरोख्त पर सात से 14 साल की सजा।

यौन शोषण के लिए नाबालिग को ले जाने पर 10 साल की सजा और जुर्माना।

संगठित अपराध में पांच साल से आजीवन कारावास और पांच लाख तक जुर्माना।

तस्करी के लिए 10 साल या आजीवन कारावास।

बहरहाल, सरकार का यह कदम नाबालिगों के शोषण को रोकने और आर्केस्ट्रा-थियेटर जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह न केवल कानून-व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में नैतिकता और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।

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