इस्लामपुरखुदागंजगाँव-जवारनालंदाबिग ब्रेकिंगभ्रष्टाचारहिलसा

पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक ने हड़पा 1.63 करोड़ का धान, प्राथमिकी दर्ज

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में सरकारी अनाज वितरण प्रणाली को झटका लगने के बाद अब एक बड़ा घोटाला सामने आया है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में पचलोवा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पैक्स) के अध्यक्ष उमेश प्रसाद और प्रबंधक मृत्युंजय कुमार पर 708.833 मीट्रिक टन धान के गबन का गंभीर आरोप लगा है। इस चोरी का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के हिसाब से करीब 1.63 करोड़ रुपये बताए जा रहे हैं।

जिला सहकारिता पदाधिकारी के निर्देश पर इस्लामपुर प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी अमित कुमार ने खुदागंज थाना को पत्र लिखकर दोनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। यह मामला न केवल वित्तीय कुप्रबंधन का है, बल्कि जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए गरीबों तक पहुंचने वाले राशन को प्रभावित करने वाला भी है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में आता है।

बताया जाता है कि पचलोवा पैक्स ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में किसानों से कुल 1737.359 मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की। सरकारी नियमों के अनुसार इस धान का समतुल्य कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) तैयार कर राज्य खाद्य निगम नालंदा को आपूर्ति करना होता है। गणना के मुताबिक 1175.67 मीट्रिक टन सीएमआर की आपूर्ति अनिवार्य थी, जो गरीब परिवारों के बीच चावल के रूप में वितरित होता। लेकिन पैक्स प्रबंधन ने केवल 696 मीट्रिक टन (एफआरके सहित) ही आपूर्ति की। जबकि शेष 479.67 मीट्रिक टन का कोई अता-पता नहीं।

जिला सहकारिता कार्यालय और सहकारिता प्रसार पदाधिकारी द्वारा कई पत्रों के जरिए शत प्रतिशत आपूर्ति का निर्देश दिया गया। लेकिन दोनों आरोपियों ने इसे ठेंगा दिखा दिया। आखिरकार 6 सितंबर 2025 को प्रबंधक मृत्युंजय कुमार की मौजूदगी में पैक्स के अधिसूचित गोदाम का भौतिक सत्यापन किया गया।

हैरानी की बात यह है कि गोदाम में धान या सीएमआर की मात्रा शून्य पाई गई! स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन न तो कोई जवाब आया और न ही बकाया आपूर्ति हुई। विभागीय पोर्टल के आंकड़ों से खुलासा हुआ कि पैक्स ने 1028.526 मीट्रिक टन धान को पचलोवा पैक्स राइस मिल को हस्तांतरित किया था। बाकी 708.833 मीट्रिक टन का क्या हुआ? आरोप है कि अध्यक्ष उमेश प्रसाद और प्रबंधक मृत्युंजय कुमार ने ही इसे गबन कर लिया।

एमएसपी दर 2300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से इस गबन की कीमत 1,63,03,159 रुपये (एक करोड़ तिरसठ लाख तीन हजार एक सौ उनसठ रुपये) आंकी गई है। दोनों आरोपी में मैड़ीखुर्द गांव के निवासी रामलखन प्रसाद के पुत्र उमेश प्रसाद हैं। जबकि मृत्युंजय कुमार भी उसी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। अब यह संयोग या साजिश? यह तो जांच में ही साफ होगा।

धान अधिप्राप्ति का पूरा सिस्टम किसानों को लाभ पहुंचाने और गरीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है। पैक्स और व्यापार मंडलों के जरिए खरीदा गया धान मिलों में प्रोसेस होकर बिहार राज्य खाद्य निगम के सीएमआर संग्रहण केंद्रों पर जमा होता है, जो सीधे जन वितरण प्रणाली के तहत राशन कार्ड धारकों तक पहुंचता है।

अब इस घोटाले से न केवल सरकारी योजनाएं विफल हुई हैं, बल्कि लाखों गरीब परिवारों का खाद्यान्न वितरण प्रभावित हुआ है। सहकारिता प्रसार पदाधिकारी अमित कुमार ने पत्र में साफ कहा है कि यह कृत्य खाद्य सुरक्षा को विफल करने और जन वितरण प्रणाली को प्रभावित करने का प्रयास है।

आरोपियों पर धोखाधड़ी, सरकारी अनाज का गबन, सरकारी कार्य में बाधा, कैश क्रेडिट ऋण का विचलन, वित्तीय कुप्रबंधन और सरकारी आदेश की अवहेलना जैसे गंभीर आरोप हैं। जिला सहकारिता पदाधिकारी के पत्रांक 2245 (दिनांक 10 सितंबर 2025) के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया गया है। प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी अमित कुमार ने खुदागंज थाना को थाना कांड संख्या उपलब्ध कराने की भी अपील की है, ताकि वरीय अधिकारियों को सूचित किया जा सके।

इस संबंध में खुदागंज थानाध्यक्ष ने बताया कि प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी के लिखित आवेदन मिलने के बाद पचलोवा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पैक्स) के अध्यक्ष उमेश प्रसाद और प्रबंधक मृत्युंजय कुमार पर 12 सितंबर 2025 को बीएनएस की धारा 316 (5), 318 (4) एवं 3 (5) के तहत कांड संख्या- 140/25 दर्ज कर लिया गया है।

बहरहाल यह मामला नालंदा जिले में सहकारिता क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाला है। किसान तो अपना धान बेचकर खुश होते हैं, लेकिन बीच में ही सरकारी अनाज गायब हो जाता है। जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया है। प्रतिलिपि जिला सहकारिता पदाधिकारी और जिला पदाधिकारी को भेजे गए पत्र से साफ है कि मामला उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। अब सवाल यह है कि क्या आरोपी बचे रहेंगे या सलाखों के पीछे पहुंचेंगे?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.