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पासी चेतना सम्मेलन: उदय नारायण चौधरी बोले- शराब नीति से अलग हो ताड़ी

Pasi Awareness Conference Uday Narayan Chaudhary said- Toddy should be separated from liquor policy
Pasi Awareness Conference Uday Narayan Chaudhary said- Toddy should be separated from liquor policy

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के राजगीर स्थित आरआईसीसी सभागार में स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी की 131वीं जयंती के अवसर पर राज्य स्तरीय पासी चेतना सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने शिरकत की और सरकार से शराब नीति से ताड़ी को अलग करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि पासी समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखता है और यह सिद्ध करता है कि वे 80 फीट ऊंचे ताड़ के वृक्ष से ताड़ी निकालने का हुनर रखते हैं। उन्होंने ताड़ी को कृषि उत्पाद बताते हुए कहा कि यह जॉन्डिस जैसी बीमारियों की अचूक दवा है। चौधरी ने यह भी उल्लेख किया कि लालू प्रसाद यादव सरकार ने ताड़ी को टैक्स-फ्री किया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे शराब नीति के तहत लाकर हजारों पासी समाज के लोगों को जेल भेजने का कार्य किया है।

दलित समाज का गौरवशाली इतिहासः पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने दलित समाज के गौरवशाली इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम में इस समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी, उनके पुत्र इंद्रदेव चौधरी, वीरांगना उदा देवी, झलकारी बाई और एतवा रजवार सहित कई क्रांतिकारियों के योगदान को रेखांकित किया।

उन्होंने बताया कि इंद्रदेव चौधरी अंग्रेजों की गोलियों का शिकार होकर शहीद हुए थे। वहीं, वीरांगना उदा देवी ने 36 अंग्रेज़ सिपाहियों को मौत के घाट उतारकर इतिहास रच दिया था। चौधरी ने कहा कि जब तक यह धरती रहेगी, तब तक अमर शहीद भगत सिंह और इंद्रदेव चौधरी को याद किया जाता रहेगा।

संविधान पर मंडरा रहे खतरे के बादलः चौधरी ने संविधान पर बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिया गया समानता का अधिकार मनुवादी ताकतों के षड्यंत्र के कारण संकट में है। उन्होंने समाज को जाति से ऊपर उठकर जमात की ओर बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि जब जमात मजबूत होगी, तभी मनुवादी जाल से बाहर निकला जा सकेगा।

उन्होंने महिलाओं के सम्मान और उनके प्रति व्यवहार में बदलाव लाने पर विशेष जोर दिया और कहा कि समाज में समानता और न्याय तभी आएगा जब सभी समुदायों को बराबरी का दर्जा मिलेगा।

इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में पासी समाज के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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