पीपल-बरगद कॉरिडोर: राजगीर बौद्ध सर्किट बनेगा हरित पर्यटन का नया राष्ट्रीय मॉडल

बोधगया-नालंदा-बिहारशरीफ को जोड़ने वाला देश का पहला हरित पीपल-बरगद कॉरिडोर, नेचर व जू सफारी समेत प्रमुख स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार

नालंदा दर्पण डेस्क। ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से समृद्ध राजगीर अब देश के पहले पीपल-बरगद कॉरिडोर के रूप में एक नई पहचान गढ़ने जा रहा है। राज्य सरकार ने बौद्ध सर्किट को हरित अवसंरचना और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की व्यापक योजना की घोषणा की है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने दो दिवसीय राजगीर दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी दी।

इस पहल के तहत बोधगया, राजगीर, नालंदा और बिहारशरीफ को जोड़ने वाली फोरलेन सड़क के दोनों किनारों पर पीपल और बरगद के पौधे लगाए जाएंगे। यह कॉरिडोर न केवल हरित छाया और स्वच्छ वातावरण प्रदान करेगा, बल्कि जैव विविधता संरक्षण का भी सशक्त उदाहरण बनेगा। अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना देश में अपनी तरह की पहली पहल होगी, जो धार्मिक पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के संतुलित विकास का मॉडल प्रस्तुत करेगी।

पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विस्तारः दौरे के दौरान अपर मुख्य सचिव ने राजगीर नेचर सफारी, राजगीर जू सफारी, वेणुवन, विश्व शांति स्तूप, घोड़ा कटोरा झील और राजगीर रोपवे का निरीक्षण कर विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नेचर और जू सफारी में टिकटों की दैनिक सीमा 1000 से बढ़ाकर 2000 करने का निर्णय लिया गया है। अतिरिक्त वाहनों की खरीद होगी, जिससे प्रतीक्षा अवधि कम होगी। समूह पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बल्क बुकिंग की सीमा छह से बढ़ाकर 40 लोगों तक की जाएगी।

नेचर सफारी तक शीघ्र पहुंच के लिए टॉय ट्रेन चलाने के प्रस्ताव पर विचार जारी है, वहीं पहुंच मार्ग का दोहरीकरण भी किया जाएगा। राजगीर ग्लास ब्रिज के समीप 100 से अधिक पर्यटकों की क्षमता वाला आधुनिक वेटिंग हॉल, कैफेटेरिया और फूड कियोस्क बनाए जाएंगे।

वेणुवन में रात्रिकालीन पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमः वेणुवन में प्रतिदिन रात्रि नौ बजे तक लाइट एंड साउंड शो तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे शाम के बाद भी पर्यटकों का ठहराव सुनिश्चित हो सके। जू सफारी के 3-डी हॉल की तर्ज पर यहां 300 सीटों वाला मल्टीपरपस हॉल विकसित होगा। स्थानीय कारीगरों के उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष दुकानें स्थापित की जाएंगी।

दिव्यांगजन, सुरक्षा और डिजिटल सुविधा पर विशेष ध्यानः दिव्यांगजनों और बच्चों के लिए रैंप, सुरक्षित पाथवे और क्रेच जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वनकर्मियों को वायरलेस सेट से लैस कर पेट्रोलिंग मजबूत की जाएगी। वेणुवन, नेचर सफारी, जू सफारी और घोड़ा कटोरा क्षेत्र में फ्री वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए 20 स्थानों पर आरओ आधारित वाटर कूलर लगाए जाएंगे तथा नेटवर्क सुविधा के लिए बीटीएस टावर स्थापित किए जाएंगे। दो एटीएम भी स्थापित होंगे।

वन्यजीव संरक्षण और नई आकर्षण योजनाएं: जू सफारी के पशु अस्पताल को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। राजगीर वन्य प्राणी सफारी को शेर और गैंडे के प्रजनन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। साथ ही नया बर्ड एवियरी पार्क भी प्रस्तावित है।

घोड़ा कटोरा झील क्षेत्र में कैफेटेरिया, चिल्ड्रेन पार्क और वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियां शुरू की जाएंगी। झील का सौंदर्यीकरण और गहराई बढ़ाने के साथ डियर पार्क विकसित करने का प्रस्ताव है। इंद्रशाल गुफा और जरासंध के चबूतरे का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

तीर्थयात्रियों और श्रमिकों के लिए नई व्यवस्थाः विश्व शांति स्तूप जाने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डोली श्रमिकों के लिए विश्राम स्थल, पेयजल, ड्रेस कोड और लाइसेंस प्रणाली लागू की जाएगी। गणेश मढैया तक सीढ़ी निर्माण कराया जाएगा।

पर्यटन प्रबंधन में सुधार के तहत अलग-अलग पार्किंग शुल्क समाप्त कर एकीकृत पार्किंग प्रणाली लागू की जाएगी। प्रशिक्षित टूर गाइडों की नियुक्ति कर उन्हें विशेष पोशाक दी जाएगी। “वन मित्र” तैनात होंगे और टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा। 50-50 कमरों के दो नए गेस्ट हाउस बनाए जाएंगे, जिनकी बुकिंग ऑनलाइन होगी। दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को चिकित्सा सुविधा देने की भी व्यवस्था की जाएगी।

20 करोड़ का वार्षिक राजस्व, अंतरराष्ट्रीय पहचान लक्ष्यः अधिकारियों के अनुसार नेचर और जू सफारी से प्रतिवर्ष लगभग 20 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है और तीन लाख से अधिक पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नई योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ लक्ष्य है कि राजगीर को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त पहचान मिले।

बहरहाल राज्य सरकार की यह पहल पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संवर्धन और स्थानीय रोजगार सृजन के समन्वित मॉडल के रूप में देखी जा रही है। यदि योजनाएं तय समय में पूरी हुईं तो राजगीर सचमुच हरित पर्यटन के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।समाचार स्रोतः मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट

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