काजल ऑर्केस्ट्रा पर छापा: यूपी की 9 नाबालिग युवतियां मुक्त, संचालक दंपति गिरफ्तार

दिल्ली रेस्क्यू फाउंडेशन एवं नालंदा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में यूपी की 9 नाबालिग युवतियों को मुक्त कराया गया, काजल ऑर्केस्ट्रा संचालक दंपति गिरफ्तार

नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के सरमेरा नगर पंचायत सह प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र में चेंरो पहुंच पथ के किनारे स्थित एक किराये के मकान में संचालित काजल ऑर्केस्ट्रा पार्टी पर छापेमारी कर नौ नाबालिग किशोरियों को मुक्त कराया गया। मौके से ऑर्केस्ट्रा संचालक दंपति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

दिल्ली से आई टीम की संयुक्त कार्रवाईः  यह कार्रवाई दिल्ली स्थित रेस्कयू फाउंडेशन   की पहल पर की गई। संस्था को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर जिले के वरीय अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई थी। छापेमारी दल में राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग, नई दिल्ली के सदस्य, एडीजी सीआईडी (बिहार सेक्शन), बाल कल्याण समिति तथा जुवेनाइल एड सेंटर के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

नालंदा के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी के निर्देश पर गठित टीम में महिला थाना, लाइन पुलिस बल एवं स्थानीय सरमेरा थाना की सक्रिय भागीदारी रही।

किराये के मकान से रेस्क्यूः छापेमारी के दौरान सड़क किनारे स्थित मकान से कुल नौ नाबालिग किशोरियों को बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि इन किशोरियों को ऑर्केस्ट्रा डांस पार्टी के नाम पर यहां रखा गया था। सभी किशोरियां उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र की निवासी बताई जा रही हैं।

रेस्क्यू फाउंडेशन के जांच पदाधिकारी अक्षय पांडे के अनुसार बरामद किशोरियों को महिला पुलिस की अभिरक्षा में थाने लाया गया है। सभी का चिकित्सीय परीक्षण कराया जाएगा, जिसके बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

संचालक दंपति पर शिकंजाः मौके से एक पुरुष एवं एक महिला दोनों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों ही ऑर्केस्ट्रा संचालन से जुड़े मुख्य कड़ी माने जा रहे हैं। इस मामले में मानव तस्करी, बाल संरक्षण कानूनों के उल्लंघन एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की तैयारी है।

बड़े रैकेट की आशंकाः सूत्रों का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतर्राज्यीय नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियां इस पहलू पर भी गंभीरता से पड़ताल कर रही हैं कि नाबालिग किशोरियों को किस माध्यम से यहां लाया गया और इनके परिजनों को क्या जानकारी दी गई थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार उक्त मकान में लंबे समय से गतिविधियां संचालित हो रही थीं, लेकिन अंदर क्या चल रहा है इसकी स्पष्ट जानकारी किसी को नहीं थी।

बहरहाल यह छापेमारी न केवल एक अवैध ऑर्केस्ट्रा संचालन का पर्दाफाश है, बल्कि बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं तथा इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं। स्रोतः मीडिया रिपोर्ट

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