
राजगीर (नालंदा दर्पण)। राजगीरवासियों के लिए एक बार फिर खुशखबरी की आहट सुनाई देने लगी है। वर्षों से प्रतीक्षा में पड़े केंद्रीय विद्यालय के प्रस्ताव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नई उम्मीद जगी है। केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण को राजगीर में केंद्रीय विद्यालय स्थापना की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
खबरों के मुताबिक केंद्रीय विद्यालय संगठन, पटना संभाग के उपायुक्त अनुराग भटनागर, सहायक आयुक्त पूर्णेदु मंडल, प्रशासनिक अधिकारी भीम सिंह, केंद्रीय विद्यालय नालंदा के प्राचार्य विवेक किशोर सहित अन्य अधिकारियों ने महादेवपुर गांव के समीप प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने पहले से चिन्हित भूमि का जायजा लिया और आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की। इस निरीक्षण के बाद यह संकेत मिलने लगे हैं कि राजगीर का बहुप्रतीक्षित सपना अब कागजों से निकलकर धरातल की ओर बढ़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में राजगीर में केंद्रीय विद्यालय खोलने का औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव के तहत महादेवपुर गांव के पास लगभग पांच एकड़ भूमि का चयन किया गया था। जिला प्रशासन द्वारा हेलीपैड के बगल में स्थित लैंड बैंक की भूमि विद्यालय के लिए चिन्हित कर केंद्रीय विद्यालय संगठन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी की गई थीं, लेकिन इसके बावजूद यह महत्वाकांक्षी योजना अंतिम चरण में अटक गई।
सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव भेजने और कुछ जरूरी प्रक्रियाओं में हुई देरी के कारण केंद्र सरकार स्तर पर समय पर इस पर विचार नहीं हो सका। नतीजतन राजगीर का प्रस्ताव मंजूरी से वंचित रह गया और योजना ठंडे बस्ते में चली गई। इस देरी का खामियाजा सीधे तौर पर राजगीर को भुगतना पड़ा, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी मायूसी फैल गई थी।
खास बात यह है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने भी केंद्रीय विद्यालय के संचालन के लिए अस्थायी तौर पर भवन और फर्नीचर उपलब्ध कराने की सहमति दी थी। इसके बावजूद योजना को हरी झंडी नहीं मिल सकी। इससे अभिभावकों और शिक्षाविदों में निराशा का माहौल बन गया था, क्योंकि राजगीर के लोग लंबे समय से केंद्रीय विद्यालय की मांग करते आ रहे हैं।
राजगीर में केंद्रीय विद्यालय की आवश्यकता इसलिए भी अधिक महसूस की जाती है, क्योंकि यह क्षेत्र शिक्षा और प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां नालंदा विश्वविद्यालय, सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर, खेल विश्वविद्यालय, खेल अकादमी, पुलिस अकादमी जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं। इन संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों और स्थानीय अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और केंद्रीय स्तर की शिक्षा की सख्त जरूरत है।
पिछले वर्ष केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद बिहारशरीफ के महानंदपुर में नए केंद्रीय विद्यालय की स्थापना पर मुहर लगने से राजगीर में भी उम्मीदें और मजबूत हुई हैं। लोगों का मानना है कि यदि इस बार प्रशासनिक स्तर पर सभी प्रयास समय पर और प्रभावी ढंग से किए गए तो राजगीर को भी केंद्रीय विद्यालय की सौगात मिल सकती है।
बुद्धिजीवियों और अभिभावकों का कहना है कि अब किसी भी तरह की देरी राजगीर के भविष्य पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि इस बार प्रस्ताव को पूरी गंभीरता के साथ अंतिम मंजूरी तक पहुंचाया जाए। ताकि वर्षों से अधूरा सपना साकार हो सके।
अब सबकी निगाहें केंद्रीय विद्यालय संगठन और संबंधित विभागों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला तो जल्द ही राजगीर के बच्चों को भी केंद्रीय विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा।





