राजगीर महोत्सव-2025ः इस बार कैलाश खेर के सुरों से गुंजेगी पंच पहाड़ियों की वादियां

राजगीर (नालंदा दर्पण)। अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्वविख्यात राजगीर में बहुप्रतीक्षित राजगीर महोत्सव-2025 का भव्य शुभारंभ 19 दिसम्बर से होने वाला है। पंच पहाड़ियों से घिरा यह ऐतिहासिक नगर अपनी घनी हरियाली, शांत वादियों, प्राचीन गुफाओं और आध्यात्मिक स्थलों के कारण देश विदेश के पर्यटकों को सदैव आकर्षित करता रहता है।

इस वर्ष राजगीर महोत्सव को और भी खास बनाने आ रहे हैं बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक पद्मश्री कैलाश खेर, जिनकी सजीव संगीत प्रस्तुति पहले ही दिन उत्सव को यादगार बना देगी। 19 दिसम्बर को होने वाली कैलाश खेर की लाइव परफॉर्मेंस से राजगीर की वादियां सुरों से गूंजेंगी। उनके भावपूर्ण और शक्तिशाली स्वर पंच पहाड़ियों की गुफाओं में प्रतिध्वनित होंगे। जंगलों में प्राकृतिक सजीवता का अहसास कराएंगे। ऐतिहासिक धरोहरों को नई ऊर्जा से भर देंगे।

कैलाश खेर की आवाज भारतीय संगीत की एक अनमोल विरासत मानी जाती है। ‘अल्लाह के बंदे’, ‘तूने मुझे भुला दिया’, ‘जिया धड़क धड़क जाए’ जैसे लोकप्रिय गीतों से उन्होंने देश-विदेश में विशेष पहचान बनाई है। सूफी, लोक और शास्त्रीय संगीत का अनूठा संगम उनकी प्रस्तुतियों को विशिष्ट बनाता है। राजगीर महोत्सव में कैलाश खेर भक्ति, प्रेम और जोश से भरपूर गीतों की विशेष प्रस्तुति देंगे।

वेणुवन, पांडू पोखर और पंच पहाड़ियां विपुलगिरी, रत्नागिरि, उदयगिरि, सोनागिरि और वैभारगिरी इन मधुर सुरों से जीवंत हो उठेंगी। यह महोत्सव बिहार सरकार और नालंदा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाता है। सामान्यतः यह आयोजन नवंबर माह में होता है, लेकिन इस वर्ष विधानसभा चुनाव के कारण इसे दिसंबर में आयोजित किया जा रहा है।

महोत्सव के दौरान हजारों दर्शक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेंगे। साथ ही नेचर सफारी, जू सफारी, आकाशीय रज्जुमार्ग, स्काई ग्लास ब्रिज और सस्पेंस ब्रिज जैसी पर्यटन गतिविधियां रोमांच को दोगुना करेंगी।

सोन भंडार गुफा, जरासंध का अखाड़ा और ब्रह्मकुंड जैसे ऐतिहासिक स्थल भी उत्सव के रंग में रंगे नजर आएंगे। यह महोत्सव स्थानीय कलाकारों को भी मंच प्रदान करेगा, जहां लोक नृत्य, लोक संगीत और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा देना भी इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। बकैल कैलाश खेर, राजगीर की प्राकृतिक ऊर्जा उनके संगीत से गहरा सामंजस्य रखती है।

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