
राजगीर (नालंदा दर्पण)। पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत के लिए विश्वविख्यात राजगीर को जल्द ही वर्षों पुरानी ट्रैफिक समस्या से राहत मिल सकती है। शहर में प्रस्तावित एलीवेटेड रोड की योजना जहां ठंडे बस्ते में चली गई है, वहीं अब उसके विकल्प के तौर पर फोरलेन बायपास निर्माण की नई और व्यावहारिक पहल ने गति पकड़ ली है। यह परियोजना न केवल यातायात दबाव कम करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन का नया उदाहरण भी पेश करेगी।
क्यों बदली योजना? सूत्रों के अनुसार एलीवेटेड रोड निर्माण में अत्यधिक लागत, तकनीकी जटिलता और पर्यावरणीय आपत्तियों के कारण सरकार ने रणनीति बदली है। इसके स्थान पर बायपास मॉडल को इसलिए तरजीह दी जा रही है, क्योंकि इससे भारी वाहनों को सीधे शहर के बाहर से डायवर्ट किया जा सकेगा और वन व कुंड क्षेत्रों पर दबाव नहीं पड़ेगा।
बायपास का प्रस्तावित स्वरूपः प्रारंभिक खाके के अनुसार यह फोरलेन बायपास नारदीगंज के वनगंगा से डोहड़ा, मधुवन, मोतनाजे, राजगृह गंगाजल जलाशय, गिरियक-राजगीर स्टेट हाईवे होते हुए आयुध निर्माणी बायपास से बस टर्मिनल तक विकसित किया जाएगा।
करीब 10 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर गया, नवादा और हिसुआ की ओर से आने वाले ट्रक, कंटेनर और अन्य भारी वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना आगे बढ़ने का रास्ता देगा।
200 करोड़ की योजना, कई स्तरों पर समन्वयः इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जिला प्रशासन के साथ-साथ पथ निर्माण विभाग, वित्त विभाग और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के बीच समन्वय शुरू हो चुका है। विभागीय स्तर पर संकेत मिल रहे हैं कि परियोजना को प्राथमिकता सूची में रखा गया है।
सिर्फ सड़क नहीं, रणनीतिक कॉरिडोरः यह बायपास केवल ट्रैफिक समाधान नहीं, बल्कि रणनीतिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। इससे पर्यटन सीजन, राजकीय खेल आयोजनों और धार्मिक मेलों के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन आसान होगा।
वहीं मुख्य बाजार, कुंड क्षेत्र और वन क्षेत्र प्रदूषण व दुर्घटनाओं से सुरक्षित रहेंगे। भविष्य में औद्योगिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों के लिए वैकल्पिक रूट उपलब्ध होगा।
भारी यातायात पृथक्करण मॉडल की संरचनाः शहरी नियोजन के सिद्धान्त के अनुसार भारी यातायात पृथक्करण मॉडल यानी भारी वाहनों को आवासीय और पर्यटन क्षेत्रों से अलग करना किसी भी संवेदनशील शहर के लिए आवश्यक है। राजगीर में प्रस्तावित फोरलेन बायपास इसी मॉडल पर आधारित है। इससे न केवल यातायात प्रवाह सुधरेगा, बल्कि शहर की लिवेबिलिटी इंडेक्स भी बढ़ेगी।
स्थानीय लोगों में खुशी की लहरः व्यापारियों, होटल संचालकों और पर्यटन से जुड़े उद्यमियों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि जाम से मुक्ति मिलने पर पर्यटक राजगीर में अधिक समय बिताएंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ होगा।
हालांकि परियोजना अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन यदि इसे प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिलती है तो आने वाले वर्षों में राजगीर की यातायात व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। स्रोत: नालंदा दर्पण / राजगीर रिपोर्टर







