चुनाव बाद राजगीर रेलवे गुमटी बंद, यातायात पर पड़ेगा असर

राजगीर (नालंदा दर्पण)। राजगीर रेलवे क्रॉसिंग, जिसे स्थानीय लोग ‘रेलवे गुमटी’ के नाम से जानते हैं, उसे स्थायी रूप से बंद करने की दिशा में रेलवे प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस कदम का उद्देश्य यातायात को और अधिक सुगम, सुरक्षित और निर्बाध बनाना है, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

रेलवे सूत्रों के अनुसार राजगीर में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के चालू हो जाने के बाद रेलवे क्रॉसिंग की सड़क की आवश्यकता अब समाप्त हो चुकी है। ओवरब्रिज का निर्माण यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और वाहन चालक सुविधा के लिए पुराने रेलवे फाटक का उपयोग कर रहे हैं। इस कारण ट्रेनों के गुजरने के दौरान गुमटी को बंद करना पड़ता है, जिससे यातायात में अनावश्यक विलंब होता है और सुरक्षा जोखिम भी बढ़ जाता है।

रेलवे प्रशासन का मानना है कि गुमटी को खुला रखना सुरक्षा मानकों के विरुद्ध है। इसलिए रेलवे ने विधानसभा चुनाव के बाद दंडाधिकारी और पुलिस बल की उपस्थिति में इस क्रॉसिंग को स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है।

रेलवे के मंडल अभियंता ने राजगीर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) से इस कार्य के लिए दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और पर्याप्त पुलिस बल की मांग की है। हालांकि एसडीओ ने विधानसभा चुनाव की व्यस्तता के कारण फिलहाल पुलिस बल और दंडाधिकारी की उपलब्धता न होने की बात कही है। यही वजह है कि गुमटी को बंद करने की कार्रवाई अब चुनाव के बाद होगी।

रेलवे के इस निर्णय से स्थानीय लोगों में असंतोष और चिंता का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गुमटी बंद होने से आयुध निर्माणी बायपास जाने वाले लोगों को असुविधा होगी। उनका तर्क है कि ओवरब्रिज के दोनों ओर सर्विस लेन की कमी के कारण वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना मुश्किल हो सकता है।

स्थानीय निवासियों ने सुझाव दिया है कि यदि प्रशासन ओवरब्रिज के दोनों ओर पहुंच मार्गों में सुधार कर दे और सर्विस लेन का निर्माण कराए तो आवागमन में होने वाली असुविधा को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि ओवरब्रिज का उपयोग भी बढ़ेगा।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि गुमटी को बंद करने का निर्णय ट्रेनों की सुरक्षा और सड़क यातायात की सुगमता को ध्यान में रखकर लिया गया है। रेलवे क्रॉसिंग पर बार-बार गुमटी बंद करने की प्रक्रिया न केवल समय की बर्बादी करती है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना को भी बढ़ाती है। ओवरब्रिज के उपयोग से यातायात को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलाया जा सकता है, जो न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि सड़क और रेल दोनों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा।

स्थानीय लोगों की चिंताओं को देखते हुए यह जरूरी है कि रेलवे और जिला प्रशासन मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें। ओवरब्रिज के आसपास बेहतर पहुंच मार्ग और सर्विस लेन का निर्माण न केवल स्थानीय लोगों की असुविधा को कम करेगा, बल्कि रेलवे के इस कदम को और अधिक स्वीकार्य बनाएगा।

चुनाव के बाद इस दिशा में होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि रेलवे प्रशासन और स्थानीय प्रशासन इस बदलाव को कैसे लागू करते हैं और क्या स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान हो पाता है।

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