
राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के प्राचीन पर्यटन नगरी राजगीर की रत्नागिरी पर्वत चोटी पर विराजमान विश्वशांति स्तूप का स्थापना दिवस इस वर्ष 25 अक्टूबर को भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, जबकि जापान की प्रमुख कंपनी सांतोकू लिमिटेड के चेयरमैन केंटुके होरियुची विशेष अतिथि होंगे।
जापान, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, कोरिया, नेपाल, वियतनाम और भूटान समेत आठ देशों से आए बौद्ध प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में यह समारोह वैश्विक शांति और सद्भाव का प्रतीक बनेगा। निप्पोनजिन म्योहोज और राजगीर बुद्ध विहार सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होंगे, जो राजगीर की आध्यात्मिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
बता दें कि विश्वशांति स्तूप की स्थापना 20वीं सदी के उत्तरार्ध में जापानी बौद्ध संगठन निप्पोनजिन म्योहोज द्वारा की गई थी। यह 34 मीटर ऊंचा सफेद संगमरमर का स्तूप रत्नागिरी पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है, जो राजगीर घाटी का विहंगम दृश्य प्रदान करता है। भगवान बुद्ध के प्रिय स्थल राजगीर में स्थित यह स्तूप न केवल बौद्ध धर्म की वैश्विक एकता का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और शांति शिक्षा का भी केंद्र रहा है।
हर वर्ष यहां लाखों तीर्थयात्री पहुंचते हैं, जो पर्वतारोहण के माध्यम से शांति और ध्यान की अनुभूति प्राप्त करते हैं। स्थापना दिवस पर यह स्थान रंग-बिरंगी पताकाओं, फूलों की मालाओं और बौद्ध ध्वजों से सजाया जाता है, जो पर्यटकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होता है। समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
विश्वशांति स्तूप के प्रमुख भिक्षु टी. ओको नोगी ने नालंदा दर्पण को बताया कि इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से ऐतिहासिक बनाने के लिए हमने सजावट, सौंदर्यीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता पर विशेष जोर दिया है। स्तूप की रंगाई-पोताई और सफाई का कार्य अंतिम चरण में है। पर्वत मार्ग पर एलइडी लाइटिंग और फूलों की चादरें बिछाई जा रही हैं, ताकि श्रद्धालु रोशनी के बीच शांतिपूर्ण यात्रा कर सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 8 बजे निप्पोनजिन म्योहोज के वरिष्ठ भिक्षु एम. साईं के नेतृत्व में बौद्ध प्रार्थना और शांति पाठ से होगा। इसके बाद महाबोधि महाविहार के थेरवाद परंपरा के भिक्षुओं द्वारा संयुक्त पूजा-अर्चना की जाएगी।
दोपहर में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान स्तूप पर पुष्प अर्पित करेंगे और मुख्य संबोधन देंगे। जापानी चेयरमैन केंटुके होरियुची वैश्विक शांति पर व्याख्यान देंगे। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम में विभिन्न देशों के बौद्ध नर्तक-गीतकार अपनी परंपरागत प्रस्तुतियां देंगे।
भिक्षु नोगी ने आगे कहा कि आयोजन के दौरान विश्वशांति, सद्भावना और करुणा के संदेश को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने पर विशेष चर्चा होगी। हम लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों को जोड़ेंगे। पर्यटन विभाग के सहयोग से विशेष बसें और रोपवे सुविधा उपलब्ध होगी, ताकि बुजुर्ग और बच्चे भी आसानी से पहुंच सकें।
इस समारोह की सबसे बड़ी खासियत आठ देशों से आए 200 से अधिक बौद्ध भिक्षुओं और प्रतिनिधियों की भागीदारी है। जापान से निप्पोनजिन म्योहोज का प्रमुख दल, श्रीलंका से थेरवाद भिक्षु, म्यांमार से ध्यान विशेषज्ञ, थाईलैंड से वन भिक्षु, कोरिया से जोन संप्रदाय के अनुयायी, नेपाल से तिब्बती बौद्ध, वियतनाम से महायान परंपरा और भूटान से द्रुकपा लाइनेज के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये सभी एक साथ शांति मार्च निकालेंगे, जो रत्नागिरी से शुरू होकर स्तूप तक पहुंचेगा।
रत्नागिरी पर्वत पर बसा यह स्तूप राजगीर की आस्था, पर्यटन और वैश्विक बौद्ध एकता का जीवंत प्रतीक है। स्थानीय व्यापारियों और होटल व्यवसायियों में भी उत्साह है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पर्यटन विभाग के अनुसार पिछले वर्ष इस समारोह में 50,000 से अधिक पर्यटक पहुंचे थे और इस बार यह संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है।





