राजस्व महाअभियान: जमीन के कागजातों में सुधार का सुनहरा अवसर

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार में जमीन से संबंधित कागजातों की गड़बड़ियों को दूर करने और जमाबंदियों को अद्यतन करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। आज से राज्यभर में राजस्व महाअभियान की शुरुआत हो चुकी है, जो 20 सितंबर 2025 तक चलेगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हर रैयत तक पहुंचकर उनकी जमीन से संबंधित अभिलेखों को दुरुस्त करना है, ताकि भविष्य में जमीन से जुड़े विवादों को रोका जा सके।

राजस्व महाअभियान के तहत राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव, घर-घर जाकर रैयतों को जमाबंदी की प्रति और आवेदन प्रपत्र उपलब्ध करा रही हैं। यदि जमाबंदी में नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, लगान आदि में कोई त्रुटि हो तो उसे मौके पर ही सुधारा जाएगा।

ऑनलाइन जमाबंदी में त्रुटि सुधार (परिमार्जन): पुरानी जमाबंदियों में मौजूद गलतियों को ठीक करना।

उत्तराधिकार नामांतरण: वारिसों के नाम जमीन के कागजातों में दर्ज करना।

बंटवारा नामांतरण: पारिवारिक हिस्सेदारी के आधार पर जमीन का बंटवारा।

गैर-डिजिटाइज्ड जमाबंदी को ऑनलाइन करना: पुराने कागजी रिकॉर्ड को डिजिटल प्रारूप में लाना।

इस अभियान से बिहार के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें जमीन के कागजातों में सुधार के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने इस अभियान को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

प्रत्येक पंचायत में विशेष शिविरों का आयोजन शुरू हो चुका है, जहां ग्रामीण अपनी जमीन से संबंधित समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। इन शिविरों में विभागीय कर्मी लैपटॉप और डोंगल के साथ मौजूद रहकर प्राप्त आवेदनों की तत्काल डिजिटल एंट्री कर रहे हैं।

प्रत्येक पंचायत में सात दिन के अंतराल पर दो-दो शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील की है। साथ ही पंचायत जनप्रतिनिधियों के सहयोग की सराहना की गई है, जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राजस्व विभाग ने सभी रैयतों से अपील की है कि वे अपने पंचायत स्तर के माइक्रो प्लान की जानकारी जरूर लें और इन शिविरों में भाग लेकर इस अवसर का लाभ उठाएं। यह अभियान न केवल जमीन के कागजातों को दुरुस्त करने का एक सुनहरा मौका है, बल्कि यह भविष्य में होने वाले विवादों को रोकने में भी मददगार साबित होगा।

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