बिहार में 223 रेलवे फाटकों पर बनेंगे आरओबी, 3 घंटे में पटना पहुंचने का लक्ष्य

इस परियोजना को गति देने के लिए मार्च से मई 2025 के बीच राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग ने अभियान चलाकर सभी 223 रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी निर्माण के लिए रेलवे से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर लिया है।

हिलसा (नालंदा दर्पण)। बिहार सरकार की पहल और रेल मंत्रालय के सहयोग से राज्य में सड़क यातायात को और सुरक्षित व सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। रेल मंत्रालय ने बिहार में 223 रेलवे फाटकों के स्थान पर रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और सड़क यातायात निर्बाध व सुरक्षित हो सकेगा।

इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 के अंत तक बिहार के किसी भी स्थान से अधिकतम तीन घंटे में राजधानी पटना पहुंचा जा सके। इस दिशा में पथ निर्माण विभाग और रेलवे के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

हाल ही में पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर कुमार सिंह, रेलवे बोर्ड आधारभूत संरचना के सदस्य नवीन गुलाटी और पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में परियोजना की प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में रेलवे बोर्ड ने 12 आरओबी/आरयूबी के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) को स्वीकृति प्रदान करने की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, 48 अन्य आरओबी के डीपीआर तैयार कर लिए गए हैं, जिन्हें जून से जुलाई 2025 के बीच स्वीकृति मिलने की संभावना है। साथ ही 112 अन्य आरओबी के लिए डीपीआर तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है।

इस परियोजना को गति देने के लिए मार्च से मई 2025 के बीच राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग ने अभियान चलाकर सभी 223 रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी निर्माण के लिए रेलवे से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर लिया है।

इसके अलावा ग्रामीण कार्य विभाग की 259 सड़कों पर स्थित रेलवे फाटकों में से 236 के लिए भी एनओसी जारी की जा चुकी है। यह कदम परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने इस परियोजना को बिहार के लिए गेम-चेंजर करार देते हुए कहा कि 223 आरओबी के निर्माण से न केवल रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होगा। इससे बिहार के किसी भी कोने से तीन घंटे में पटना पहुंचने का लक्ष्य जल्द साकार होगा।

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