Sachin Tendulkar: यहां होती है क्रिकेट के भगवान की पूजा-अर्चना

नालंदा दर्पण डेस्क। 24 अप्रैल 2025 को क्रिकेट जगत के दिग्गज सचिन तेंडुलकर (Sachin Tendulkar) 52 वर्ष के हो गए। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर मैथ्यू हेडन ने उन्हें “गॉड ऑफ क्रिकेट” की उपाधि दी थी, जब उन्होंने 100 अंतरराष्ट्रीय शतक पूरे किए। हेडन ने कहा था- “मैंने क्रिकेट के भगवान को देखा है।” आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के लिए सचिन का दर्जा भगवान जैसा ही है। बिहार के कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में उनकी मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है, जो उनकी लोकप्रियता और सम्मान का प्रतीक है।
कैमूर जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर अतरवलिया गांव में 19 नवंबर, 2013 को सचिन तेंडुलकर की मूर्ति स्थापित की गई थी। यह पहल भारतीय क्रिकेट टीम के 2011 वनडे विश्व कप जीतने के बाद फिल्म अभिनेता और सांसद मनोज तिवारी ने शुरू की थी। सफेद संगमरमर से बनी इस मूर्ति में सचिन को भारतीय क्रिकेट टीम की पोशाक में ट्रॉफी के साथ दर्शाया गया है। पिछले 12 वर्षों से देश के कोने-कोने से क्रिकेट प्रशंसक इस मूर्ति के दर्शन के लिए आते हैं।
मूर्ति की स्थापना के समय मनोज तिवारी ने गांव में युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने गांव में एक क्रिकेट स्टेडियम बनाने की घोषणा भी की थी, जिसे पूरा करने का प्रयास जारी है।
वर्तमान में मूर्ति की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी मनोज तिवारी के भतीजे राहुल तिवारी संभाल रहे हैं। इस वर्ष पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के कारण सचिन का जन्मदिन समारोह सादगी से मनाया जाएगा। राहुल ने बताया कि केक काटने जैसे आयोजन नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “हम सचिन के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे, लेकिन उत्सव सीमित रहेगा।”
मूर्ति स्थापना के समय घोषित क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। राहुल तिवारी ने बताया कि इस दिशा में प्रयास जारी हैं। स्टेडियम के बनने से गांव के युवाओं को क्रिकेट में अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर अवसर मिलेगा। यह स्टेडियम न केवल अतरवलिया, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी खेल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बता दें कि सचिन तेंडुलकर ने अपने 24 साल के करियर में 100 अंतरराष्ट्रीय शतक, 34357 रन और कई विश्व रिकॉर्ड बनाए। उनकी उपलब्धियां न केवल क्रिकेट के लिए, बल्कि भारतीय खेल संस्कृति के लिए भी प्रेरणादायक हैं। अतरवलिया गांव में उनकी मूर्ति स्थापित होना इस बात का प्रमाण है कि सचिन केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए एक आदर्श और प्रेरणा स्रोत हैं।
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