
नूरसराय (नालंदा दर्पण)। बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के गृह विधानसभा क्षेत्र नालंदा में स्थित नूरसराय बाजार इन दिनों जलजमाव की समस्या से जूझ रहा है। पिछले एक दशक से चली आ रही यह समस्या मानसून के मौसम में और भी विकराल रूप धारण कर लेती है।
मामूली बारिश में ही पूरा बाजार तालाब में तब्दील हो जाता है, जिससे न केवल व्यापार ठप हो जाता है, बल्कि स्थानीय निवासियों की जिंदगी दूभर हो जाती है। मंत्री श्रवण कुमार पिछले तीन दशक से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। फिर भी मूलभूत समस्याओं का समाधान दूर की कौड़ी नजर आता है। आइए, जानते हैं इस समस्या की गहराई और इसके प्रभाव को।
नूरसराय बाजार की सड़कें और गलियां बारिश के पानी से लबालब भरी रहती हैं। स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि जलजमाव के कारण उनका सामान अक्सर भींग जाता है, जिससे हजारों-लाखों का नुकसान हो जाता है।
एक दुकानदार ने बताया कि बारिश आते ही हमारी दुकानें बंद हो जाती हैं। ग्राहक तो दूर, खुद हमें दुकान तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। मंत्री जी चुनाव के समय आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन काम? कुछ नहीं!” यह समस्या अब केवल बाजार तक सीमित नहीं रही। इसका असर आसपास के गांवों, स्कूलों और यहां तक कि धार्मिक स्थलों पर भी पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है शिक्षा का क्षेत्र। संगतपुर के मध्य विद्यालय और उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 1500 बच्चे रोजाना इस जलजमाव की मार झेल रहे हैं। स्कूल के मुख्य गेट पर ही तालाब जैसी स्थिति बनी रहती है, जहां गंदा पानी जमा हो जाता है।
विद्यालय की एक शिक्षिका ने नालंदा दर्पण से बातचीत में कहा कि पानी स्कूल कैंपस के अंदर तक घुस जाता है। बच्चों को बड़ी मुश्किल से स्कूल आना पड़ता है। कई बार वे पानी में गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। गंदे पानी के बीच से होकर आना-जाना स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है।
वहीं एक छात्रा श्वेता ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि मुख्य गेट पर गंदा पानी जमा रहने से स्कूल पहुंचना बहुत कठिन हो जाता है। हमारी किताबें और यूनिफॉर्म गीले हो जाते हैं। कभी-कभी तो पानी भरे गड्ढों में गिरने से चोट लग जाती है। पढ़ाई का माहौल बिल्कुल खराब हो गया है।
इन बच्चों की यह समस्या नई नहीं है। पिछले 10 सालों से यही हालात हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। पहले समस्या केवल बाजार के कुछ हिस्सों तक थी। लेकिन अब यह स्कूलों, घरों, दुकानों और यहां तक कि शिव मंदिर तक फैल गई है।
जलजमाव का असर स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि मानसून में हर साल दर्जनों लोग बीमार पड़ते हैं। हमारे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। डॉक्टर के पास जाना भी मुश्किल हो जाता है। क्योंकि रास्ते पानी से भरे होते हैं।
इस समस्या की जड़ में नालों की कमी और जल निकासी की खराब व्यवस्था है। संगतपुर निवासी अजय कुमार की कहानी दिल दहला देने वाली है। पिछले दो-तीन सालों में स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि मुझे अपना घर छोड़कर किराए के मकान में शिफ्ट होना पड़ा। बारिश के दौरान घर में पानी घुस जाता है। सब कुछ बर्बाद हो जाता है। जनप्रतिनिधि आते हैं, आश्वासन देते हैं, लेकिन काम कुछ नहीं होता।
इस मुद्दे पर नूरसराय प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) का कहना है कि नाला निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। हालांकि, जब उनसे टेंडर की राशि, निर्माण की समय सीमा और समस्या के समाधान की निश्चित तारीख के बारे में पूछा गया तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। यह सवाल उठाता है कि क्या यह सिर्फ एक और आश्वासन है, या वाकई कोई बदलाव आएगा?
बहरहाल नूरसराय के निवासी अब थक चुके हैं। वे मांग कर रहे हैं कि मंत्री श्रवण कुमार और स्थानीय प्रशासन इस समस्या पर तत्काल ध्यान दें। यदि जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है। क्या तीन दशकों के प्रतिनिधित्व के बाद भी मूलभूत सुविधाएं मिल पाएंगी? यह सवाल हर स्थानीय निवासी के मन में है।





