Home आधी आबादी सिलाव की बेटी प्रियंका: रग्बी खेल से दरोगा तक का प्रेरक सफर

सिलाव की बेटी प्रियंका: रग्बी खेल से दरोगा तक का प्रेरक सफर

Silav's daughter Priyanka An inspiring journey from playing rugby to becoming a police inspector
Silav's daughter Priyanka An inspiring journey from playing rugby to becoming a police inspector

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार के नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड के बिद्दुपुर गांव की प्रियंका कुमारी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। तमाम सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को पार कर प्रियंका ने न केवल रग्बी के मैदान में अपनी पहचान बनाई, बल्कि आज वह बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में देश की सेवा कर रही हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना ने प्रियंका के सपनों को पंख दिए। प्रियंका बताती हैं कि जब वह रग्बी खेलने जाती थी, तब न तो उनके पास अच्छा ग्राउंड था और न ही खेल का सामान। गांव के लोग ताने मारते थे, लेकिन आज वही लोग मुझे ‘दारोगा जी’ कहकर सम्मान देते हैं।

प्रियंका का रग्बी का सफर उनके छोटे भाई से प्रेरित होकर शुरू हुआ। वह बताती हैं कि उनका भाई सुबह रास बिहारी स्कूल के ग्राउंड में प्रैक्टिस करने जाता था। वह भी उसके साथ जाने लगी। वहां उसने रग्बी के बारे में जाना और धीरे-धीरे इसे खेलना शुरू किया। लेकिन यह सफर आसान नहीं था।

गांव में खेल को लेकर रूढ़िवादी सोच और ताने उन्हें सुनने पड़ते थे। लोग कहते थे कि लड़की होकर रग्बी खेलती हो। कुछ और काम करो। इन तानों से प्रियंका को दुख होता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हमारी मेहनत और लगन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

प्रियंका की इस यात्रा में उनके कोच जय सिंह और रग्बी गर्ल श्वेता शाही ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रियंका बताती हैं कि कोच जय सिंह और श्वेता दीदी ने मुझे न केवल प्रोत्साहन दिया, बल्कि आर्थिक मदद भी की। उनकी वजह से ही उसने राष्ट्रीय स्तर पर एक गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल जीते। 2022 में पटना, गोवा और गुजरात में आयोजित रग्बी प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

प्रियंका का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से है। चार बहनों और दो भाइयों में चौथे नंबर की प्रियंका का परिवार आज भी एक झोपड़ी में रहता है। वह भावुक होकर कहती हैं कि बारिश में छत से पानी टपकता था। बहुत मुश्किल दौर से गुजरकर वह इस मुकाम तक पहुंची है। उनके पिता पवन भारती मजदूरी करते हैं और मां रीना देवी गृहणी हैं। 26 अगस्त 2023 को प्रियंका की बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में जॉइनिंग हुई। इसके साथ ही 2024 में उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई भी पूरी की।

प्रियंका की सफलता पर उनके पिता पवन भारती की आंखों में गर्व की चमक साफ झलकती है। वह कहते हैं कि लोग पहले ताने मारते थे, लेकिन आज मुझे दारोगा प्रियंका के पिता कहकर सम्मान देते हैं। बेटी की सफलता से परिवार को आर्थिक सहारा मिला है।

वर्तमान में प्रियंका पश्चिमी चंपारण में बिहार पुलिस में अपनी सेवाएं दे रही हैं। साथ ही वह राजगीर में होने वाली एशियाई रग्बी अंडर-20 सेवेंस चैम्पियनशिप के लिए बिहार पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण और सुरक्षा ड्यूटी में व्यस्त हैं। प्रियंका का अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश का नाम रोशन करना है। वह कहती हैं कि उनकी कहानी से बाकी खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे अपने परिवार व देश का नाम ऊंचा करेंगे।

प्रियंका की सफलता ने नालंदा के अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया है। राजगीर में होने वाली एशियन चैम्पियनशिप में नालंदा की एक और बेटी अल्पना कुमारी का भारतीय महिला रग्बी टीम में चयन हुआ है। यह उपलब्धि स्थानीय खिलाड़ियों में उत्साह का माहौल पैदा कर रही है। प्रियंका की कहानी न केवल नालंदा, बल्कि पूरे दुनिया के लिए एक मिसाल है कि मेहनत और जुनून से कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।

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