एसयू कॉलेज का 70 साल पुराना छात्रावास भवन भर-भराकर गिरा

हिलसा (नालंदा दर्पण)। हिलसा नगर के सूर्य मंदिर के समीप स्थित एसयू कॉलेज का 70 साल पुराना छात्रावास भवन अब पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस जर्जर भवन का आधा हिस्सा हाल ही में भरभराकर ढह गया, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। गनीमत रही कि घटना के वक्त भवन में कोई मौजूद नहीं था, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि भवन का बचा हुआ हिस्सा अब भी खतरे की घंटी बजा रहा है और स्थानीय लोगों में इसके और गिरने का भय बना हुआ है।

स्थानीय लोगों और छात्रों ने भवन की जर्जर हालत को देखते हुए कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इसे धराशाई करने की मांग की थी। आवेदन और शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हाल ही में बरसात के दौरान लोकायन नदी का पानी शहर में घुस आया था। जिसके कारण इस भवन के आसपास 2 से 3 फीट तक पानी जमा हो गया। लगभग एक सप्ताह तक पानी भरा रहने से भवन की नींव और दीवारें और कमजोर हो गईं। लोगों ने पहले ही आशंका जताई थी कि यह भवन कभी भी ढह सकता है और अब यह आशंका सच साबित हुई है।

भवन का बचा हुआ हिस्सा अब भी खतरे का सबब बना हुआ है। इलाके में कोचिंग हब होने के कारण सुबह से शाम तक सैकड़ों छात्र-छात्राएं और आम लोग इस रास्ते से गुजरते हैं। जर्जर भवन के ठीक बगल से होकर आवागमन करने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही बचे हुए हिस्से को धराशाई नहीं किया तो यह भवन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि यह भवन सीधे-सीधे मौत को दावत दे रहा है। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

भूतनबंगला बन चुका है ऐतिहासिक छात्रावासः 1955 में निर्मित यह छात्रावास कभी एसयू कॉलेज का गौरव हुआ करता था। उस दौर में यहां रहने वाले छात्रों से यह भवन गुलजार रहता था। लेकिन पिछले कई वर्षों से यह भवन खाली पड़ा हुआ है और धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गया। अब यह भवन असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है।

स्थानीय लोगों के अनुसार असामाजिक तत्व इस भवन के दरवाजे, खिड़कियां और यहाँ तक कि गेट तक उखाड़कर ले जा चुके हैं। रात के समय यहां नशा करने वालों का जमावड़ा लगता है, जिससे आसपास के लोगों में असुरक्षा की भावना और बढ़ गई है।

यह जर्जर भवन न केवल राहगीरों के लिए, बल्कि आसपास खेलने वाले बच्चों और युवाओं के लिए भी खतरा बना हुआ है। भवन के आसपास का मैदान क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों के लिए इस्तेमाल होता है। छोटे बच्चे और युवा अक्सर इस जर्जर भवन के आसपास बैठते और खेलते हैं, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस भवन को तुरंत धराशाई किया जाए और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जाए।

हिलसा के नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि इस जर्जर भवन को जल्द से जल्द तोड़ा जाए ताकि किसी अनहोनी को रोका जा सके। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह भवन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। प्रशासन को न केवल इस भवन को धराशाई करना चाहिए, बल्कि इस क्षेत्र को असामाजिक तत्वों से मुक्त करने के लिए भी कदम उठाने चाहिए।

Nalanda Darpan

नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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