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पेपर लीक सरगना संजीव मुखिया समेत 55 अपराधियों की संपत्ति पर लटकी तलवार

Sword hanging over the property of 55 criminals including paper leak kingpin Sanjeev Mukhiya
Sword hanging over the property of 55 criminals including paper leak kingpin Sanjeev Mukhiya

हिलसा (नालंदा दर्पण)। नालंदा के कुख्यात पेपर लीक सरगना संजीव मुखिया, बालू माफिया रामप्रवेश राय और कोटक महिंद्रा बैंक के शाखा प्रबंधक सुमित कुमार की अवैध संपत्ति पर अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नजर है।

बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने इनके साथ-साथ 55 अन्य अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की सिफारिश ईडी को भेजी है। इनमें से 22 अपराधियों की करीब 11 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही जब्त की जा चुकी है। यह कार्रवाई नालंदा सहित पूरे बिहार में आर्थिक अपराधों पर नकेल कसने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

बता दें कि नालंदा के नूरसराय हॉर्टिकल्चर कॉलेज में निलंबित तकनीकी सहायक संजीव मुखिया, जिसे ‘लुटना’ के नाम से भी जाना जाता है, वह लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक करने का सरगना रहा है। नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में उसकी गिरफ्तारी ने पूरे देश में हलचल मचा दी।

जांच में खुलासा हुआ कि मुखिया का गिरोह बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे कई राज्यों में सक्रिय है। यह गिरोह न केवल नीट, बल्कि बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की शिक्षक भर्ती और कांस्टेबल भर्ती जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक में भी शामिल रहा है।

ईडी की जांच में पाया गया कि मुखिया के पास उसकी वैध आय से 144% अधिक संपत्ति है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों की ओर इशारा करता है।

डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो  के अनुसार संजीव मुखिया और उसके सहयोगियों ने अवैध तरीके से अकूत संपत्ति अर्जित की है। हमारी सिफारिश पर ईडी इनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया तेज कर रही है।

फिलहाल ईओयू ने 55 अपराधियों की सूची तैयार की है, जिनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें 36 मादक पदार्थ तस्कर, 10 बालू माफिया, 15 नक्सली उग्रवादी और 4 कुख्यात अपराधी शामिल हैं।

डीआईजी ढिल्लो के अनुसार कुछ मामलों में ईओयू और ईडी ने संयुक्त जांच की है, जिससे कई बड़े खुलासे हुए हैं। इन अपराधियों ने अवैध तरीके से अर्जित धन को संपत्ति, बैंक खातों और विदेशी कंपनियों में निवेश किया है।

उदाहरण के लिए, पटना के एक्जीविशन रोड स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजर सुमित कुमार पर 35 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप है। पूछताछ में पता चला कि सुमित ने दक्षिण अफ्रीका और फिलीपींस की प्रतिबंधित कंपनियों में धन हस्तांतरित किया। यह मामला बिहार में बढ़ते आर्थिक अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है।

राज्य में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ईओयू जल्द ही एक अलग साइबर विंग गठित करने जा रही है। डीआईजी (साइबर) संजय कुमार ने बताया कि सिम बॉक्स से जुड़े एक बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश हुआ है।

जालसाजों ने फर्जी वेबसाइट बनाकर आधार सत्यापन और अन्य सेवाओं के नाम पर लोगों का बॉयोमेट्रिक डेटा चुराया। इस डेटा का इस्तेमाल नकली सिम कार्ड बनाने में किया गया, जिसमें निजी मोबाइल कंपनियों के डीलरों की संलिप्तता भी सामने आई है।

संजय कुमार ने कहा कि साइबर अपराध अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है। नया साइबर विंग इस तरह के अपराधों पर लगाम लगाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होगा। इसके लिए डीएसपी सहित अन्य अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

नालंदा कभी शिक्षा और ज्ञान का विश्वविख्यात केंद्र था, आज संजीव मुखिया जैसे अपराधियों की वजह से चर्चा में है। इन अपराधों का असर न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था और आर्थिक ढांचे पर पड़ रहा है। पेपर लीक और साइबर फ्रॉड जैसी घटनाएं नौजवानों के भविष्य को खतरे में डाल रही हैं।

ऐसे में ईओयू और ईडी की यह संयुक्त कार्रवाई बिहार में आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक मजबूत कदम है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई अपराधियों को पूरी तरह रोक पाएगी? क्या साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए नया साइबर विंग पर्याप्त होगा?

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