बिहार के संस्कृत विद्यालयों में जल्द शुरू होगी शिक्षक बहाली, जानें डिटेल

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के संस्कृत विद्यालयों में लंबे समय से रिक्त पड़े शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों के पदों पर अब जल्द ही बहाली की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस खबर ने न केवल विद्यालय प्रशासन, बल्कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भी खुशी की लहर दौड़ दी है।
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने प्रदेश के 26 जिलों के जिला अधिकारियों (डीएम) को एक सप्ताह के भीतर रिक्त पदों के लिए आरक्षण रोस्टर तैयार कर बोर्ड को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
बोर्ड अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में रोस्टर उपलब्ध नहीं कराया गया तो इसकी पूरी स्थिति से राज्य सरकार को अवगत कराया जाएगा। जिन 26 जिलों से रोस्टर मांगा गया है। जिनमें पटना, नालंदा, नवादा, गया, जहानाबाद, अरवल, रोहतास, कैमूर, बक्सर, मुंगेर, लखीसराय, जमुई, शेखपुरा, खगड़िया, भागलपुर, बांका, चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और गोपालगंज शामिल हैं।
यह निर्देश बोर्ड के षष्ठम स्मार पत्र के माध्यम से जारी किया गया है, जिसमें रिक्त पदों के लिए आरक्षण रोस्टर को शीघ्र स्वीकृत कर बोर्ड को भेजने का आदेश दिया गया है।
बता दें कि लंबे समय से बिहार के संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई-लिखाई की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कई विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या न के बराबर रह गई है, जिसके कारण विद्यार्थियों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है। कुछ विद्यालयों में तो एक या दो शिक्षकों के भरोसे ही पूरी शैक्षणिक व्यवस्था चल रही है। इस स्थिति ने न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है, बल्कि अभिभावकों में भी असंतोष पैदा किया है।
संस्कृत विद्यालयों में शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों की बहाली का मुद्दा बिहार विधान परिषद के 209वें सत्र में भी जोर-शोर से उठा था। इस दौरान सदन में नियुक्ति प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को लेकर कई सवाल पूछे गए थे। इसके जवाब में विशेष निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) शिक्षा विभाग ने 12 मार्च 2025 को सभी जिलों को निर्देश जारी कर एक माह के भीतर आरक्षण रोस्टर तैयार कर बोर्ड को भेजने को कहा था। हालांकि, कई जिलों ने अब तक इस निर्देश का पालन नहीं किया, जिसके कारण नियुक्ति प्रक्रिया में बार-बार देरी हो रही है।
बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने अब अंतिम स्मार पत्र जारी कर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रोस्टर के अभाव में न केवल सरकारी आदेशों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि संस्कृत विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था भी चरमरा रही है। इस स्मार पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि समय सीमा में रोस्टर उपलब्ध नहीं कराया गया, तो बोर्ड इसकी पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
बहरहाल, नियुक्ति प्रक्रिया के पूरी होने के बाद न केवल शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि संस्कृत विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। अभिभावकों और विद्यार्थियों को उम्मीद है कि यह प्रक्रिया शीघ्र पूरी होगी और संस्कृत विद्यालय फिर से अपनी पुरानी गरिमा हासिल करेंगे।





