प्रोन्नति प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर शिक्षकों का संघर्ष का ऐलान

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया में गड़बड़ी के खिलाफ बिहार प्रारंभिक शिक्षक संघ (गोप गुट) ने निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया है। यह निर्णय बिहारशरीफ भैंसासुर स्थित मॉडल मध्य विद्यालय में जिलाध्यक्ष सुनीता सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। इस बैठक में जिले भर से आए शिक्षकों ने प्रोन्नति सूची में गंभीर खामियों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया।

शिक्षकों ने राघवेन्द्र शर्मा बनाम राज्य सरकार मामले के आधार पर जिला शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई प्रोन्नति सूची को त्रुटिपूर्ण करार दिया। उनका कहना है कि प्रोन्नति प्रक्रिया में भूतलक्षी प्रभाव से कई योग्य शिक्षकों को नजरअंदाज किया गया, जबकि कई अपात्र शिक्षकों को लाभ पहुंचाया गया।

शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 1994 में नियुक्त शिक्षकों को उसी वर्ष से प्रशिक्षित वेतनमान प्राप्त हुआ था और वरीय वेतनमान 2006 में लागू किया गया। इसके बावजूद जिला शिक्षा विभाग ने 1999 को आधार वर्ष मानते हुए 2007 से प्रोन्नति लागू की, जिससे गंभीर विसंगतियां उत्पन्न हुई हैं।

बैठक में यह भी खुलासा हुआ कि जिन शिक्षकों को अब तक कोई प्रोन्नति नहीं मिली, उनका वेतन उन शिक्षकों से अधिक है, जो अब प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। यह स्थिति शिक्षकों के बीच भारी असंतोष का कारण बन रही है। प्रोन्नति सूची में तत्काल संशोधन की मांग उठी और शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

जानकारी के अनुसार जिले में कुल 608 शिक्षकों को प्रोन्नति दी गई है, जिनमें 256 विज्ञान संकाय और 352 कला संकाय के शिक्षक शामिल हैं। हालांकि शिक्षकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही, जिसके कारण कई योग्य शिक्षक अवसर से वंचित रह गए।

बैठक में संजीव कुमार, सतीश प्रसाद, शंकर कुमार, रंजीत कुमार, मो. ग्यासुद्दीन, संजय कुमार, चंद्रशेखर प्रसाद, सत्येन्द्र कुमार, मनोज कुमार, सुरेन्द्र शाही, मुश्ताक अहमद, शैलेन्द्र कुमार, राजीव रंजन, रतन गुप्त सहित दर्जनों शिक्षकों ने हिस्सा लिया। सभी ने एक स्वर में प्रोन्नति प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता की मांग की।

इस मामले पर नालंदा के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने कहा कि प्रोन्नति सूची विभागीय नियमों के अनुसार तैयार की गई है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया भी पूरी की गई थी। इसलिए किसी प्रकार की अनदेखी का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, शिक्षक संघ इस जवाब से संतुष्ट नहीं है और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष के लिए तैयार है।

शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से बातचीत करेंगे। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने से भी नहीं हिचकेंगे। शिक्षकों का कहना है कि यह केवल उनके अधिकारों की लड़ाई नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास है।

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