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थप्पड़बाज थरथरी थानेदार सस्पेंड, वायरल वीडियो से हिल उठा नालंदा पुलिस

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद नालंदा पुलिस अधीक्षक ने थरथरी थाना प्रभारी को किया सस्पेंड, नई तैनाती…

थरथरी (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में एक बार फिर पुलिस की वर्दी सवालों के घेरे में है। कानून का डर दिखाने वाली पुलिस जब खुद कानून को पैरों तले रौंदने लगे तो सिस्टम पर भरोसा डगमगाना तय है।

थरथरी थाना प्रभारी द्वारा एक महिला के साथ की गई मारपीट और बदसलूकी का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पुलिस महकमे में भूचाल आ गया। मामला इतना संगीन था कि नालंदा के पुलिस अधीक्षक भरत सोनी को बिना देर किए थरथरी थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंघानिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित करना पड़ा।

कोर्ट के आदेश पर पहुंचे थे, लेकिन मर्यादा भूल बैठे

जानकारी के अनुसार, थरथरी थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंघानिया पुलिस बल के साथ दीरीपर गांव पहुंचे थे। कोर्ट के आदेश पर वारंटी रामवचन गोप की गिरफ्तारी करनी थी, जिसके खिलाफ पहले से वारंट जारी था।

पुलिस को देखते ही गांव में हलचल मच गई। परिजनों ने गिरफ्तारी का विरोध किया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। लेकिन हालात संभालने के बजाय थानेदार खुद बेकाबू होते नजर आए।

महिला पर थप्पड़, बाल पकड़कर घसीटना वीडियो ने उड़ा दिए होश

आरोप है कि विरोध के दौरान थानाध्यक्ष ने वारंटी की पत्नी, जो एक आंगनबाड़ी सेविका है, पर हाथ उठा दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वर्दीधारी अधिकारी महिला के बाल पकड़कर घसीट रहा है और खुलेआम थप्पड़ जड़ रहा है। यह कोई छिपी हुई घटना नहीं थी, बल्कि कैमरे में कैद एक ऐसी सच्चाई थी, जिसने पुलिस की कथित “सख्ती” को बेनकाब कर दिया।

सोशल मीडिया पर आग, जनता में उबाल

वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई। लोग सवाल पूछने लगे कि क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है? क्या वर्दी पहनते ही इंसानियत खत्म हो जाती है?

जिलेभर में पुलिस की कार्यशैली पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। सामाजिक संगठनों ने इसे महिला सम्मान और कानून व्यवस्था दोनों पर हमला बताया और दोषी अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई।

थानेदार की सफाई बनाम सच्चाई

जब थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंघानिया से उनका पक्ष पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि पुलिस टीम पर हमला करने की कोशिश हुई थी और हालात काबू में करने के लिए सख्ती जरूरी थी।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर महिला पुलिस कार्य में बाधा डाल रही थी, तो उसे रोकने के लिए महिला पुलिसकर्मी को आगे क्यों नहीं किया गया? क्या कानून व्यवस्था के नाम पर एक महिला को सरेआम पीटना जायज है? जवाब साफ है, बिल्कुल नहीं।

एसपी की सख्ती, नया प्रभारी तैनात

मामले की गंभीरता को देखते हुए नालंदा एसपी भरत सोनी ने साफ संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हो। उन्होंने थरथरी के थानाध्यक्ष को तत्काल निलंबित करते हुए थाने की जिम्मेदारी हिलसा अंचल के पुलिस निरीक्षक चंद्रभानु को सौंप दी है। यह कार्रवाई पुलिस महकमे के लिए चेतावनी भी है और जनता के लिए उम्मीद की किरण भी।

कानून के रक्षक ही बन जाएं भक्षक तो भरोसा कैसे बचे?

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब कानून की रखवाली करने वाले ही अपनी ताकत का दुरुपयोग करें, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निलंबन के बाद आगे की जांच में क्या ठोस कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।

बिहारशरीफ से नालंदा दर्पण के लिए रंजीत सोनी की रिपोर्ट

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