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15 अक्टूबर तक रोक से अवैध बालू खनन और कालाबाजारी की आशंका बढ़ी

नालंदा में बालू खनन पर यह रोक पर्यावरण संरक्षण के लिए एक आवश्यक कदम है, लेकिन इसके साथ ही अवैध खनन और कालाबाजारी की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन को और सख्ती बरतनी होगी...

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में 15 जून 2025 से आगामी चार महीनों 15 अक्टूबर 2025 तक सभी अधिकृत बालू घाटों पर खनन कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। पर्यावरण संरक्षण और मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए खनन विभाग ने यह वार्षिक रोक लागू की है, जो बिहार सरकार की अधिसूचना के तहत है।

इस निर्णय से जिले के 15 से 20 अधिकृत बालू घाटों पर खनन गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। इनमें फाल्गु नदी के घाट (इसुआ, सिलाव, पावापुरी, गिरियक) और पंचाने नदी के घाट (परवलपुर, एकंगरसराय, नूरसराय) प्रमुख हैं, जहां पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड के तहत खनन संचालित हो रहा था।

वर्तमान में बालू की सरकारी दर 35 से 40 रुपये प्रति क्विंटल है। एक ट्रैक्टर में औसतन 100 से 120 क्विंटल बालू की ढुलाई होती है, जिसके हिसाब से एक ट्रैक्टर की सरकारी कीमत 3,500 से 4,200 रुपये तक होती है। घाट से दूरी के आधार पर निजी परिवहन लागत जोड़ने पर यह दर और बढ़ जाती है।

अब खनन पर रोक के कारण बालू की आपूर्ति में कमी की आशंका है, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं। खनन विभाग और जिला प्रशासन का दावा है कि सरकारी स्टॉक में पर्याप्त बालू उपलब्ध है, जो सामान्य जरूरतों को पूरा करेगा। हालांकि बाजार में मांग और आपूर्ति के असंतुलन से कीमतों में उछाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

खनन पर रोक के साथ ही अवैध खनन और बालू की कालाबाजारी की आशंका बढ़ गई है। निर्माण कार्यों की निरंतर मांग के चलते कुछ क्षेत्रों में रात के अंधेरे में चोरी-छिपे खनन की गतिविधियां होने की संभावना जताई जा रही है।

विगत वर्षों में भी इस अवधि के दौरान अवैध खनन के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें ट्रैक्टर और ट्रक जब्त किए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि कालाबाजारी के कारण बालू की कीमतें अनियंत्रित हो सकती हैं, जिससे छोटे निर्माणकर्ताओं और आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए जिला प्रशासन और खनन विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं। संभावित अवैध खनन वाले क्षेत्रों में नियमित छापेमारी के लिए क्षेत्रवार निगरानी दल गठित किए गए हैं। प्रत्येक अनुमंडल में पुलिस, खनन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीमें तैनात की गई हैं। खनन विभाग ने स्पष्ट किया है कि रोक का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना और वाहन जब्ती शामिल है।

खनन विभाग के अनुसार मानसून के दौरान नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने और नदी तटों के कटाव को रोकने के लिए यह रोक जरूरी है। मानसून में खनन से नदी बेसिन को नुकसान पहुंचता है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन और बाढ़ का खतरा बढ़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम नदी संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही बालू की आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए प्रभावी वैकल्पिक उपायों की भी जरूरत है।

हालांकि चार महीने की इस रोक से जहां पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है, वहीं दूसरी ओर यह निर्माण उद्योग और छोटे व्यवसायियों के लिए चुनौतियां भी लाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को बालू की वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए ताकि बाजार में अस्थिरता को कम किया जा सके। साथ ही, अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तकनीकी समाधान जैसे ड्रोन निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग का उपयोग बढ़ाया जा सकता है।

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