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स्ट्रीट लाइट की बदहाली से पर्यटन नगरी राजगीर की छवि पर संकट

राजगीर (नालंदा दर्पण)। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की पर्यटन नगरी राजगीर इन दिनों एक गंभीर समस्या से जूझ रही है। शहर की सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइट्स की बदहाली ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। नगर परिषद क्षेत्र में लगे आधे से अधिक स्ट्रीट लाइट पोल महीनों से खराब पड़े हैं, जिसके चलते मुख्य मार्गों से लेकर वार्डों की संकरी गलियों तक शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। यह स्थिति न केवल स्थानीय लोगों के लिए असुविधा का कारण बन रही है, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा और शहर की वैश्विक छवि को भी गहरा नुकसान पहुंचा रही है।

शहरवासियों का कहना है कि स्ट्रीट लाइट्स के अभाव में अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं। रात के समय सड़कों पर असुरक्षा का माहौल बन रहा है। खासकर महिलाओं और बच्चों को अंधेरी गलियों में निकलने में डर लगता है।

स्थानीय दुकानदार भी इस समस्या से परेशान हैं। बाजार क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट्स की कमी के कारण ग्राहक देर तक रुकने से कतराते हैं, जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है।

राजगीर बौद्ध, जैन और हिंदू धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। यहां हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। लेकिन खराब स्ट्रीट लाइट्स के कारण रात के समय शहर की सैर करने वाले पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारों का कहना है कि राजगीर जैसे पर्यटन स्थल पर रात के समय सुरक्षित और रौशन वातावरण होना बेहद जरूरी है। खराब लाइटिंग न केवल पर्यटकों की धारणा को नकारात्मक बनाती है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को भी कमजोर करती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद हर साल स्ट्रीट लाइट्स की मरम्मत और रखरखाव के लिए लाखों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

नगर परिषद के एक अधिकारी ने बताया कि पुरानी और खराब हो चुकी वेपर लाइट्स के कारण समस्या बनी हुई है। साथ ही रखरखाव के लिए ठेकेदारों की लापरवाही भी एक बड़ा कारण है। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

तकनीकी विशेषज्ञों का सुझाव है कि पुरानी और ऊर्जा खपत वाली वेपर लाइट्स की जगह आधुनिक एलईडी लाइट्स का उपयोग किया जाना चाहिए। एलईडी लाइट्स न केवल बेहतर रोशनी प्रदान करती हैं, बल्कि बिजली की खपत को भी कम करती हैं। इससे नगर परिषद का रखरखाव खर्च भी कम होगा।

शहरवासियों ने नगर परिषद से मांग की है कि सभी खराब स्ट्रीट लाइट्स की तत्काल मरम्मत की जाए और शहर को दूधिया रोशनी से जगमग किया जाए। स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम की स्थापना से लाइट्स की निगरानी और समय पर मरम्मत सुनिश्चित की जा सकती है।

नगर परिषद को चाहिए कि वह इस समस्या को प्राथमिकता दे और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर स्थायी समाधान निकाले। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जिसका असर न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था, बल्कि पर्यटन उद्योग पर भी पड़ेगा।

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