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नालंदा में 5% अधिक वोटिंग में छुपा है विधानसभा परिणाम में उलट-पुलट का राज

The secret to the swing in the assembly results lies in the 5% higher voter turnout in Nalanda.

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के तहत नालंदा जिले में संपन्न मतदान ने न केवल लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण दिया, बल्कि पिछले चुनावों की तुलना में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ राजनीतिक समीकरणों में बड़े उलट-पुलट का संकेत भी दे दिया।

जिले का औसत मतदान प्रतिशत 57.58 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो 2020 के विधानसभा चुनाव में दर्ज 52.5 प्रतिशत से स्पष्ट रूप से ऊपर है। यह वृद्धि मतदाताओं के उत्साह और मुद्दों की गहराई को रेखांकित करती है, जहां स्थानीय स्तर पर विकास, बेरोजगारी, शिक्षा और जातीय समीकरण जैसे कारक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में मतदान की विस्तृत जानकारी साझा की। डीएम कुंदन कुमार ने बताया कि पूरे जिले में मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त रहा।

उन्होंने कहा कि मतदाताओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। सातों विधानसभा क्षेत्रों अस्थावां, बिहारशरीफ, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा और हरनौत में बिना किसी गड़बड़ी के मतदान संपन्न हुआ।  जिले में कुल 68 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 22.42 लाख है। इनमें पुरुष मतदाता 11.81 लाख, महिला मतदाता 10.61 लाख और थर्ड जेंडर मतदाता 54 शामिल हैं।

यह बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत कोई साधारण आंकड़ा नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 5 प्रतिशत की यह वृद्धि सीटों के परिणाम को पूरी तरह पलट सकती है। पिछले चुनावों में नालंदा की कई सीटें मामूली अंतर से जीती या हारी गई थीं। उदाहरण के लिए 2020 में कुछ क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत 50 के आसपास था, जहां कांटे की टक्कर देखी गई।

इस बार महिलाओं और युवा मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी ने आंकड़ों को नया रंग दिया है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से आगे निकलता दिखा, जो स्थानीय मुद्दों जैसे जल संकट, सड़क और शिक्षा पर आधारित असंतोष को दर्शाता है।

जिले के सातों क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में विविधता देखी गई, जो स्थानीय राजनीतिक ध्रुवीकरण को उजागर करती है। अस्थावां में 54.65%, बिहारशरीफ में 53.05%, राजगीर में  60.80%, इस्लामपुर में 59.84%, हिलसा में 60.31%, नालंदा में 60.63% और हरनौत में 55.72% वोटिंग रहे हैं।

राजगीर, हिलसा और नालंदा जैसे क्षेत्रों में 60 प्रतिशत से ऊपर का मतदान कृषि मुद्दों से प्रेरित लगता है। वहीं बिहारशरीफ जैसे शहरी क्षेत्र में कम प्रतिशत शहरी उदासीनता या व्यस्तता का संकेत देता है।

एक विशेष उदाहरण कतरीसराय प्रखंड का है, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां कुल मतदाताओं की संख्या 35,272 है पुरुष 18,673 और महिलाएं 16,599। इनमें से 20,240 मतदाताओं ने वोट डाला, जिसमें महिलाएं 9,780 और पुरुष 10,460 रहे। यह आंकड़ा महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता को रेखांकित करता है।

प्रशासन ने मतदान को समावेशी बनाने के लिए विशेष कदम उठाए। 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं और दिव्यांगों के लिए होम वोटिंग की सुविधा प्रदान की गई, जिससे सैकड़ों लोगों ने घर बैठे मताधिकार का प्रयोग किया।

इसके अलावा, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। नालंदा कॉलेज बिहारशरीफ स्थित स्ट्रॉन्ग रूम में सभी ईवीएम को डबल लॉक, सीसीटीवी कवरेज और 24 घंटे सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती के साथ सुरक्षित रखा गया है। उम्मीदवारों और उनके अभिकर्ताओं को लाइव सीसीटीवी फीड देखने की अनुमति दी गई, जो पारदर्शिता की मिसाल है।

मतगणना 14 नवंबर 2025 को सुबह 8 बजे नालंदा कॉलेज में शुरू होगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने कहा कि मतदान के दौरान जिले में पूर्ण शांति रही। पुलिस की सतर्कता से कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। मतगणना भी इसी शांतिपूर्ण माहौल में होगी।

मतदान प्रक्रिया की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सराही गई। कोलंबिया के राष्ट्रीय निर्वाचन परिषद से आए प्रतिनिधि न्यायाधीश आल्ट्स अलेजांद्रो बाक्वेरो रूएडा और सलाहकार जुआन कैमिलो मैनुएल होयोस मुन्योस ने नालंदा के आदर्श मतदान केंद्रों का दौरा किया। उन्होंने निष्पक्षता, पारदर्शिता और तकनीकी व्यवस्था की प्रशंसा की।

बहरहाल नालंदा में संपन्न मतदान न केवल आंकड़ों की कहानी है, बल्कि बदलते बिहार की राजनीतिक हवा का संकेत भी। 5 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी क्या वाकई उलट-पुलट लाएगी? मतगणना के दिन इसका जवाब मिलेगा।

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